श्री रेणुका जी झील से मिली मृतक मछलियों का खुला राज
प्रदूषण व मत्स्य विभाग की संयुक्त टीम ने किया घटनास्थल का निरीक्षण
HNN/ श्री रेणुका जी
सतयुग कालीन उत्तर भारत की प्रमुख धार्मिक झील श्री रेणुका जी की मछलियों की मौत को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार वीरवार को पोलूशन कंट्रोल डिपार्टमेंट तथा मत्स्य विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम के द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण किया गया। असल में हाल ही में झील के आसपास कुछ मृतक मछलियां मिली थी। जिनमें से कुछ मछलियों के अवशेष मिट्टी में भी दफन किए गए थे। अब क्योंकि इस झील की मछलियों के शिकार पर आस्था के चलते पूरी तरह से प्रतिबंध है।

यही नहीं देश के प्रसिद्ध वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक की बेथीमेट्री रिपोर्ट में गाद व अन्य कारणों को लेकर एक चिंताजनक रिपोर्ट भी सबमिट की गई थी। इसी दौरान झील के परिधि क्षेत्र में मृतक मछलियां भी मिल गई। इस घटना के बाद मीडिया में आई रिपोर्टों को लेकर सरकार और प्रशासन दोनों अलर्ट मोड़ पर आ गए थे। तो वही इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हुए जिला प्रशासन ने मत्स्य एवं पोलूशन डिपार्टमेंट को जांच के लिए आदेश भी जारी किए।
मत्स्य विभाग की ओर से जांच अधिकारी उप निरीक्षक तेजेंदर प्रकाश ने बताया कि झील की सभी मछलियां लगभग पूरी तरह से स्वस्थ हैं। उन्होंने बताया कि संभवत झील से मछलियों का अवैध कार्य किया गया था। उन्होंने बताया कि चोरी से मारी गई मछलियां ले जाते समय कुछ मछलियां इधर-उधर गिर गई होंगी। उपनिरीक्षक ने यह भी बताया कि उनके पास जो वीडियो वायरल हो रहे थे और अन्य फोटोग्राफ्स भी मिल गई थी। उन्होंने यह भी बताया कि उनके द्वारा झील का पूरी सघनता से निरीक्षण किया गया।
मगर झील के पानी व अन्य कारणों पर किए गए विस्तृत जांच के बाद ऐसा कोई भी कारण नहीं मिला जिसके कारण मछलियां मर सके। बता दें कि इस पवित्र झील में सबसे ज्यादा कॉमन कॉर्प , ग्रास कॉर्प तथा रोहू प्रजाति की मछलियां हैं। वही जिला सिरमौर मुख्य पोलूशन अधिकारी पवन शर्मा ने बताया कि इस पवित्र झील का हर महीने बीओडी यानी बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड पीएच तथा डीओ यानी डिजाल्व ऑक्सीजन वगेरा चैक किए जाते हैं।
अच्छी बात तो यह है कि आगाज सितंबर, अक्टूबर, नवंबर, दिसंबर तक जितने भी इस पवित्र झील के पानी के सैंपल लिए हैं वह सभी बेहतर मिले हैं। अच्छी बात तो यह है कि मछलियों को जो पानी में ऑक्सीजन मिलनी चाहिए, जिसको डीओ यानी डिजाल्व ऑक्सीजन कहते हैं, वह प्रति लीटर 5 या 6एमजी होनी चाहिए। लिए गए सैंपल की जांच में इसका लेवल भी 7.8, 6.9 एमजी प्रति लीटर यानी बहुत बेहतर रहा है। इसी प्रकार बीओबी का लेवल जहां प्रति लीटर दो से तीन एमजी होना चाहिए तो यह भी 1.9 तथा 2.0 रहा है।
इसका लेवल मेले आदि के दौरान थोड़ा ऊपर नीचे हो जाता है मगर अन्य समय यह बिल्कुल सामान्य रहता है। जिला सिरमौर पोलूशन अधिकारी पवन शर्मा का कहना है कि झील का बीओडी बना रहे इसको लेकर आसपास जो दुकान या अन्य निर्माण हैं उनकी गार्बेज शौचालयों की गंदगी किस तरीके से मैनेज की जा रही है इस पर बराबर वॉच रखना जरूरी है। क्योंकि यदि आसपास बने भवनों से शौचालय अन्य गंदा पानी आदि की कोई लिखित झील तक पहुंचती है तो यह खतरनाक साबित हो सकती है।
बरहाल इस झील की सुरक्षा को लेकर सरकार और प्रशासन पूरी तरह से सजग है। यही नहीं जिला सिरमौर प्रशासन ने इस झील कि जो हाल ही में रिपोर्ट आई है उसको लेकर भी एक्सरसाइज शुरू कर दी है। अब देखना यह भी होगा कि यदि इस पवित्र झील से अवैध रूप से शिकार किया गया है तो उन्हें कब सलाखों के पीछे डाला जाएगा। यह आम पुलिस की जांच का विषय बन गया है।
वही सरकार को अब इस पवित्र झील की मछलियों के संरक्षण को लेकर चारों तरफ बेहतरीन किस्म के सीसीटीवी कैमरे भी लगाने होंगे। उपनिरीक्षक मत्स्य विभाग तेजेंदर प्रकाश ने बताया कि जो मृतक मछली मिली है वह सड़क पर मिली है न की झील में। जाहिर है कि झील से मछली का शिकार चुराते हुए यह मछली सड़क गिरी हुई मिली है। इसीलिए यह अवैध शिकार व चोरी का मामला नजर आता है।
उधर, सोमप्रकाश पटयाल उपनिदेशक मत्स्य विभाग ने खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि उनके अधिकारी द्वारा की गई जांच में पाया गया कि मछलियां किसी भी तरह के जलीय कारण से नहीं मरी है बल्कि सड़क पर पाई गई है जोकि अवैध रूप से चोरी कर मारे जाने का मामला है।