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सनौरा–नेरीपुल सड़क के लिए 200 करोड़ की मंजूरी, कांग्रेस–भाजपा में श्रेय लेने की होड़

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन 3 Feb 2026 Edited 3 Feb 1 min read

सीआरआईएफ के तहत मिली सैद्धांतिक स्वीकृति, सड़क की गुणवत्ता को लेकर पुराने अनुभवों ने बढ़ाई चिंता

राजगढ़

सड़क सुधार को मिली बड़ी स्वीकृति
राजगढ़ उपमंडल से गुजरने वाली कुम्हारहट्टी–यशवंतनगर–नेरीपुल–छैला सड़क के सुधारीकरण के लिए भारत सरकार के भूतल परिवहन मंत्रालय द्वारा सीआरआईएफ के तहत 200 करोड़ रुपये की सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद कांग्रेस और भाजपा में श्रेय लेने की होड़ मच गई है। हालांकि इस सड़क के लिए भाजपा कार्यकाल के दौरान कोई डीपीआर तैयार नहीं की गई थी, इसके बावजूद केंद्र से मंजूरी मिलते ही श्रेय लेने की राजनीति शुरू हो गई है।

डीपीआर के आधार पर मिली स्वीकृति
लोक निर्माण विभाग मंडल राजगढ़ के अधिशासी अभियंता पवन गर्ग के अनुसार विभाग ने वर्ष 2024 में इस सड़क के सुधारीकरण के लिए डीपीआर तैयार कर राज्य सरकार को भेजी थी, जिसके आधार पर केंद्र सरकार ने 200 करोड़ रुपये की सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की है। उन्होंने बताया कि परियोजना के तहत नेरीपुल से सनौरा तक लगभग 37 किलोमीटर सड़क को पक्का किया जाएगा तथा तंग मोड़ों को चौड़ा किया जाएगा।

छोटे पुलों के निर्माण का भी प्रस्ताव
परियोजना में पैरवी खड्ड, जघेड़ नाला और बझेतु खड्ड पर तीन छोटे पुलों के निर्माण का भी प्रस्ताव है। यह सड़क सेब सीजन के दौरान अत्यधिक दुर्घटनाओं के लिए जानी जाती है। कई स्थानों पर तंग मोड़ों के कारण ओवरलोड ट्रक अनियंत्रित होकर गिरि नदी में गिर चुके हैं। प्रशासन द्वारा इस हिस्से को दुर्घटना संभावित क्षेत्र घोषित किया गया है।

पहले भी उठ चुके हैं गुणवत्ता पर सवाल
गौरतलब है कि इससे पहले भी इस सड़क के सुधारीकरण के लिए 46 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। वर्ष 2020 में एक निजी कंपनी को सड़क पक्का व चौड़ा करने का कार्य सौंपा गया, लेकिन कंपनी द्वारा की गई टायरिंग मात्र तीन माह में ही उखड़ गई थी। भारी विरोध के बाद कंपनी को दोबारा टायरिंग करनी पड़ी, जिससे इस परियोजना की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।

डिजाइन क्षमता से अधिक भार बड़ी समस्या
लोक निर्माण विभाग की डीपीआर के अनुसार यह सड़क केवल 9 टन भार क्षमता वाले वाहनों के लिए डिजाइन की गई थी, जबकि सेब सीजन में इस मार्ग पर 30 से 40 टन क्षमता वाले ट्रॉलों की आवाजाही जारी रहती है। इसी कारण सड़क बार-बार क्षतिग्रस्त होती रही है।

स्थानीय लोगों ने गुणवत्ता पर जोर दिया
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या 200 करोड़ रुपये की नई मंजूरी से सड़क की वास्तविक काया पलट होगी या फिर पिछली परियोजना की तरह यह राशि भी गुणवत्ताहीन कार्यों की भेंट चढ़ जाएगी। उल्लेखनीय है कि छैला–नेरीपुल–सनौरा–ओच्छघाट–कुम्हारहट्टी सड़क एक ऑल वेदर रोड है, जिसके माध्यम से अपर शिमला का सेब देश की विभिन्न मंडियों तक पहुंचता है। इसके बावजूद सरकार ने इस मार्ग को स्टेट हाईवे से घटाकर मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड का दर्जा दे रखा है। अधिशासी अभियंता के अनुसार 200 करोड़ की मंजूरी के बाद भी सड़क का दर्जा एमडीआर ही रहेगा।

राजगढ़ ब्लॉक के लोगों का कहना है कि राजनीतिक दलों को श्रेय लेने की राजनीति छोड़कर निर्माण की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए, अन्यथा अतीत की तरह करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद भी सड़क की हालत में कोई ठोस सुधार नहीं होगा।