हिमाचल का पारंपरिक वाद्य यंत्र रिज मैदान पर पर्यटकों को कर रहा आकर्षित
HNN / शिमला
राजधानी शिमला के रिज मैदान पर भाषा एवं संस्कृति विभाग की तरफ से लगी कला व शिल्प मेला में हर दिन हजारों लोग प्रदर्शनी देखने के लिए आ रहे हैं। प्रदर्शनी में वाद्य यंत्रों को भी लाया गया हैं। हिमाचल में देवी देवताओं के पर्वों पर बजने वाले वाद्य यंत्रों को बनाने का काम वीर सिंह जिला मंडी पिछले 20-25 सालों से बना रहे हैं। प्रदर्शनी में उन्होंने रणसिंघा, करनाल, पाशा व अष्टधातू की मूर्तियां शामिल की हैं।
जो लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। वहीं प्रदर्शनी में देव वाद्य यंत्रों को देखने के लिए युवा भी काफी ज्यादा तादाद में आ रहे हैं। बात रणसिंघा की करे तो एक रणसिंघा को बनाने में 12 से 14 दिनों का समय लगता है। रणसिंघा व करनाल को बनाने में तांबे का इस्तेमाल किया जाता है। इन सब चीजों को बनानें में 6000 तक खर्चा आ जाता है। इसके अलावा करनाल बहुत बिकते है। इसे बनाने में 18 से 20 दिन का समय लगता है।
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभी हाल ही में जी-20 शिखर सम्मेलन में स्पेन के प्रधानमंत्री को करनाल की जोड़ी भेंट की थी, जो हिमाचल में बनी थी। इतना ही नहीं, पीएम मोदी ने बिलासपुर के लुहणू मैदान में एक सभा में मंच से रणसिंघा को भी फूंक मारी थी।
वाद्य यंत्रों के अलग-अलग हैं दाम
रणसिंघा- 16,500
करनाल- 15,500
अष्टधातू की मूर्तियां- 35,000
कृष्ण की मूर्ति(छोटी)- 500
छत्र- 4700