कलगी धर ट्रस्ट बड़ू साहिब में गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व की तैयारी शुरू
HNN/नाहन
अव्वल अल्लाह नूर उपाय कुदरत के सब बंदे, एक नूर ते सब जग उपजा कौन भले कौन मंदे,
माटी एक अनेक बांटकर, साजी सज्जन हारे
ना कछ पोछ माटी दे भांडे, ना कछ पोंछ कुंभारे
हो ओ माटी एक अनेक बांटकर, साजी सज्जन हारे…
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सिख मत के प्रथम संचालक व प्रथम गुरु बाबा नानक देव जी का यह अमर संदेश और उसका प्रकाश आज भी पूरे ब्रह्मांड को रोशन कर रहा है। यही नहीं 20 रुपए से भूखे साधु संतों को भोजन करने से शुरू हुआ लंगर आज देश और दुनिया के हर गुरु घर में अटूट परंपरा निभा रहा है। 27 दिसंबर को गुरु नानक देव जी का 554वां प्रकाश उत्सव है। हालांकि उनका यह प्रकाश उत्सव पूरे देश और दुनिया में बड़े हर्षो उल्लास के साथ मनाया जा रहा है मगर हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के बड़ू अकाल अकादमी में इसकी भव्यता चार चांद लगाने को तैयार हो चुकी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से लगातार प्रभात फेरी निकाली जा रही है। संस्था के प्रमुख गुरु सेवादार काका वीर जी ने बताया कि प्रकाश पर्व के दिन सबसे पहले प्रभात फेरी निकाली जाएगी फिर नगर कीर्तन के साथ दोपहर 12:00 से लेकर रात के 9:00 बजे तक दरबार सजाया जाएगा। इस दौरान अकाल अकादमी और संस्था के बच्चे शब्द कीर्तन आदि पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ आयोजित करेंगे।

काका वीर जी ने बताया कि इस दिन ढाढ़ी वारें आयोजित करी जाएगी। साथ ही अटूट लंगर भी सजाया जाएंगा। श्री कलगी धर ट्रस्ट बड़ू साहिब के संचालक काका वीर जी ने तमाम देश व प्रदेश वासियों को श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व की शुभकामनाएं भी दी है। उन्होंने बताया कि आज समाज को श्री गुरु नानक देव जी के बताए हुए मार्ग पर दृढ़ता और संकल्प के साथ चलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने हाथों से कर्म करना चाहिए और परमपिता का नाम जपते हुए बंड छको यानी जो आपको उसे परमपिता की कृपा से मिलता है उसे सब में बांटकर छको।

काका वीर जी ने गुरु नानक देव जी के उसे महान कृत्य को दोहराते हुए कहा कि गुरु नानक देव जी के पिता मेहता कालू राम व्यापारी का काम करते थे। उन्होंने बताया कि गुरु नानक देव जी के पिता ने उन्हें दुकान के लिए सामान लाने हेतु 20 रुपए दिए। बताया जाता है कि जब गुरु नानक देव जी दुकान के लिए सौदा लेने जा रहे थे तो उन्हें रास्ते में कुछ भूखे साधु नजर आए। गुरु नानक देव जी ने उसे 20 रुपए के सौदे को उन भूखे साधुओं में परोस दिया।

घर आने पर जब उनके पिता ने दुकान के सौदे के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि वह सच्चा सौदा करके आए है। बस तभी से 20 रुपए का वह राशन इतना बरकत वाला हुआ कि आज हर गुरु घर में रात दिन अटूट लंगर सेवा उनके बताए हुए मार्ग पर चल रही है। बता दें कि गुरु नानक देव जी के द्वारा शुरू हुई इस लंगर परंपरा को सिखों के दूसरे गुरु गुरु अंगद देव जी की पत्नी खीवी जी के द्वारा खंदूर साहिब में भोजन बनाकर शुरू की थी। और उसके बाद आज भी यह अटूट लंगर सेवा मानवता की परंपरा को बिना किसी भेदभाव के लगातार जारी रखे हुए हैं।
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