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अयोध्या / 6 अप्रैल को दोपहर 12 बजे होगा रामलला का सूर्य तिलक, वैज्ञानिकों की टीम पहुंची

हिमाचलनाउ डेस्क • 27 Mar 2025 • 1 Min Read

अयोध्या में इस वर्ष 6 अप्रैल को राम नवमी के अवसर पर दोपहर 12 बजे रामलला का सूर्य तिलक होगा। मंदिर ट्रस्ट ने “सूर्य तिलक मैकेनिज्म” को इस तरह से विकसित किया है कि आने वाले 19 वर्षों तक सूर्य तिलक का समय हर साल बढ़ता जाएगा। इस पद्धति को तैयार करने के लिए रुड़की के वैज्ञानिकों की एक टीम अयोध्या पहुंच चुकी है, और सूर्य तिलक के लिए आवश्यक उपकरणों को स्थापित करने का कार्य शुरू हो गया है।

कैसे होगा सूर्य तिलक?

रामलला के सूर्य तिलक के लिए विशेष ऑप्टो-मैकेनिकल सिस्टम तैयार किया गया है। इसके तहत:

  • मंदिर के तीसरे तल पर लगे दर्पण पर सूर्य की किरणें गिरेंगी
  • किरणें 90 डिग्री पर परावर्तित होकर एक पीतल के पाइप में प्रवेश करेंगी
  • पाइप के अंतिम छोर पर लगे दूसरे दर्पण से किरणें फिर परावर्तित होकर लंबवत दिशा में नीचे की ओर चलेंगी
  • रास्ते में लगे तीन विशेष लेंस किरणों की तीव्रता बढ़ाएंगे
  • अंत में लंबवत पाइप के दूसरे छोर पर लगे दर्पण से किरणें 90 डिग्री पर मुड़कर सीधे रामलला के मस्तक पर पड़ेंगी
  • यह सूर्य तिलक तीन से चार मिनट तक 75 मिमी के गोल आकार में प्रकट होगा

बिजली या बैटरी का उपयोग नहीं

इस गियर-बेस्ड सूर्य तिलक मैकेनिज्म में किसी भी प्रकार की बिजली, बैटरी या लोहे का उपयोग नहीं किया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया प्राकृतिक सूर्य प्रकाश और दर्पणों की परावर्तन प्रणाली पर आधारित होगी।

हर साल बढ़ेगा सूर्य तिलक का समय

वैज्ञानिकों के अनुसार, अगले 19 वर्षों तक सूर्य तिलक की अवधि धीरे-धीरे बढ़ती जाएगी। वर्ष 2044 में यह चक्र 2025 की स्थिति पर वापस आ जाएगा। यह गणना भारतीय खगोलीय भौतिकी संस्थान, बेंगलुरु द्वारा किए गए अनुसंधान पर आधारित है, जिसमें सौर और चंद्र कैलेंडरों के 19 वर्षीय चक्र को ध्यान में रखा गया है

वैज्ञानिक दृष्टि से अनोखा प्रयोग

यह भारतीय खगोलशास्त्र के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और अनोखा प्रयोग है, जिसमें भारतीय खगोलशास्त्री और वैज्ञानिकों की टीम ने मंदिर निर्माण के साथ खगोलीय गणनाओं को जोड़ने का कार्य किया है। इससे भविष्य में अन्य मंदिरों में भी इस तरह की वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग की संभावनाएं बढ़ेंगी

अयोध्या में रामलला के सूर्य तिलक की यह व्यवस्था पूरी तरह से स्वचालित और स्थायी रूप से लागू हो चुकी है। अब हर रामनवमी पर राम जन्मोत्सव के साथ सूर्य की किरणें भी भगवान राम के मस्तक का अभिषेक करेंगी।