Category: Sirmour

  • पुलिस के हत्थे चढ़े तीन आरोपी, जल शक्ति विभाग स्टोर में लगाई थी सेंध

    पुलिस के हत्थे चढ़े तीन आरोपी, जल शक्ति विभाग स्टोर में लगाई थी सेंध

    HNN/ श्री रेणुका जी

    श्री रेणुका जी के अंतर्गत आने वाले ददाहू में पुलिस ने चोरी के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले में पुलिस ने पिकअप चालक नरेंद्र कुमार, धौला कुआं के कबाड़ी प्रेम चंद व ददाहू के हरीश शर्मा को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ केस दर्ज कर आगामी कार्यवाही शुरू कर दी है।

    गौरतलब है कि 1 फरवरी को किसी अज्ञात चोरों ने जल शक्ति विभाग के स्टोर में पुराने पंप, पुलिया, गेट वाल और अन्य मशीन व पुराने सामान पर हाथ साफ कर लिया था। जिसके बाद विभाग के पंप ऑपरेटर दीपक ने इस बाबत पुलिस थाना में शिकायत दर्ज करवाई थी। जिसके बाद अब जाकर पुलिस की टीम ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया है। बता दे चोरी हुए सामान की कीमत लगभग लाखों में आंकी गई है ।

    उधर, मामले की पुष्टि करते हुए डीएसपी मुकेश कुमार डढवाल ने बताया कि चोरी के मामले में पुलिस ने तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने चोरी में इस्तेमाल हुई पिकअप (HP-71-1921) को जब्त कर लिया है।

  • श्री रेणुका जी झील के अस्तित्व पर संकट, अधिकतम गहराई रह गई मात्र 30 फुट

    श्री रेणुका जी झील के अस्तित्व पर संकट, अधिकतम गहराई रह गई मात्र 30 फुट

    वाडिया इंस्टिट्यूट ऑफ हिमालयन के वैज्ञानिक की पब्लिश हुई झील की बेथीमेट्री में हुआ खुलासा

    HNN/ श्री रेणुका जी

    सतयुग कालीन देश की आस्था का प्रमुख प्रतीक माने जाने वाली श्री रेणुका जी झील के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लग पड़ा है। वाडिया इंस्टिट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वरिष्ठ वैज्ञानिक नरेंद्र मीणा के द्वारा झील की बेथीमेट्री हिमालयन जियोलॉजी में पब्लिश हो चुकी है। बेथीमेट्री यानी जल की गहराई नापने में इस्तेमाल होने वाली टेक्निक में बड़ा खुलासा यह हुआ है कि श्री रेणुका जी झील की गहराई केंद्र में केवल 30 फुट के लगभग रह गई है, जबकि रिसर्च डॉक्यूमेंट के हिसाब से इस पवित्र झील के आसपास भारी मात्रा में गाद और जल में उगने वाले फंगस पेड़-पौधे आदि भी काफी मात्रा में हो चुके हैं।

    ऐसे में यदि झील का उपचार वाडिया इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिकों की देख-रेख में ना किया गया तो निश्चित ही यह झील एक छोटे से तालाब मात्र में सिमट कर रह जाएगी। यही नहीं आस्था का प्रतीक माने जाने वाली इस पवित्र झील में मछलियों को आटा खिलाया जाना इसके प्राकृतिक संतुलन को बुरी तरह से बिगाड़ता हुआ भी नजर आ रहा है। झील पर बन रहा इस बड़े खतरों की वजह झील के चारों तरफ प्रोटेक्शन वॉल का ना बना होना तथा मेले के दौरान लोगों के द्वारा आसपास के क्षेत्र में मल-मूत्र आदि का त्याग किया जाना बड़ा कारण माना जा रहा है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, बरसात के दिनों में जमीन में रचा हुआ मल-मूत्र पानी में बह कर झील तक पहुंच जाता है। जिसके चलते पानी में उगने वाले पेड़ पौधों को काफी मात्रा में यूरिया मिलता है जिससे जलीय पौधे मजबूती के साथ झील का स्थान घेर रहे हैं। बता दें कि यह झील ना केवल आस्था का प्रतीक है बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर यह रामसर साइट पर भी दिखाया गया है। झील में बढ़ती गाद और कम होती गहराई के चलते यहां पर आने वाले प्रवासी पक्षियों की संख्या में भी लगातार कमी दर्ज की जा रही है।

    वाडिया इंस्टिट्यूट ऑफ हिमालयन देहरादून के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ नरेंद्र मीणा ने बताया कि इस झील के संरक्षण को लेकर उनके द्वारा वैज्ञानिक तरीके से कैसे इसको बचाया जाए इसकी योजना भी उनके पास है। उन्होंने बताया कि इसके लिए प्रदेश सरकार को बड़ी गंभीरता के साथ झील को संरक्षित करना होगा जिसके लिए वह अपनी सेवाएं देने को भी तैयार हैं। तो वही उपायुक्त सिरमौर आरके गौतम ने बताया कि फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के साथ मिलकर इस धार्मिक स्थल पर सीवरेज व्यवस्था बनाए जाने को लेकर योजना का प्रारूप बना लिया गया है।

    वहीं मेले के दौरान पालकिया लेकर आने वाले प्रमुख धार्मिक प्रतिनिधियों तथा आम जनमानस का अब यह भी मानना है कि झील के साथ लगते कुब्जा पवेलियन थे। मेले के दौरान लगने वाले व्यापारिक प्रतिष्ठानों को गिरी नदी में शिफ्ट किया जाना चाहिए। लोगों का कहना है कि कुब्जा पवेलियन में प्रदेश के अन्य देवी-देवताओं को भी निमंत्रण देकर मेले के अंतर्राष्ट्रीय महत्व को और अधिक प्रभावशाली बनाना पड़ेगा। यही नहीं मेले के दौरान होने वाली कल्चर एक्टिविटीज भी गिरी नदी के डेल्टा में आयोजित की जानी चाहिए।

    प्रबुद्ध लोगों का मानना है कि अब मेले के आयोजन का प्रारूप बदलने की जरूरत है ताकि झील पर आया संकट खत्म हो सके और इसकी धार्मिक महत्वता धार्मिक पर्यटन के नजरिए से भी गौरवशाली हो सके। लोगों का यह भी मानना है कि यदि मेला गिरी नदी के डेल्टा में आयोजित किया जाता है तो उससे ट्रैफिक व्यवस्था सहित अन्य परेशानियों से भी निजात मिलेगी। यही नहीं मेले के धार्मिक महत्व के साथ-साथ इसका व्यापारिक महत्व ही बढ़ जाएगा। कुब्जा पवेलियन में प्रदेश के अन्य देवी देवताओं को भगवान परशुराम जी और मां रेणुका जी की तरफ से निमंत्रण दिए जाने पर धार्मिक पर्यटन भी भरपूर मात्रा में होंगे।

  • प्रदेश सरकार को रेणुका डैम निर्माण में खनिज संपदा से मिलेगी 200 करोड़ से अधिक की रॉयल्टी

    प्रदेश सरकार को रेणुका डैम निर्माण में खनिज संपदा से मिलेगी 200 करोड़ से अधिक की रॉयल्टी

    148 मीटर हाइट वाले रॉकफिल श्री रेणुका डैम में लगेगी 33.147 लाख क्यूबिक मीटर क्ले और….

    HNN / श्री रेणुका जी

    बहुउद्देशीय योजना के तहत बनने जा रहा श्री रेणुका जी डैम प्रदेश के लिए सोने की चिड़िया साबित होगा। बांध निर्माण की टेक्निकल डीपीआर के मुताबिक इसमें लाखों क्यूबिक मीटर खनिज संपदा का इस्तेमाल होगा। लगाए गए मोटे अनुमान के अनुसार इस्तेमाल होने वाले अलग-अलग खनिजों से प्रदेश सरकार को करीब 200 करोड़ से अधिक की रॉयल्टी भी प्राप्त होगी। यही नहीं रॉक फिल टाइप बांध की दीवार में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी से स्थानीय किसान भी करोड़पति बन जाएंगे।

    कैसी होगी बांध की मुख्य दीवार
    श्री रेणुका जी बांध की रिवर बेड से ऊंचाई 148 मीटर रखी गई है। जबकि इस बांध की जॉब हार्ड रॉक तक गहराई 32 मीटर के लगभग आंकी गई है। करीब 24 किलोमीटर लंबी बनने वाली झील को रोकने के लिए जो बांध की दीवार की चौड़ाई 844.5 मीटर नीचे से रखी जाएगी, जिसकी टॉप विडथ 12 मीटर होगी। यानी 1 किलोमीटर के लगभग मोटाई वाला यह बांध सुरक्षा के नजरिए से काफी मजबूत माना जाएगा।

    बांध की मजबूती में क्या होगा इस्तेमाल
    श्री रेणुका जी बांध के निर्माण में लाखों क्यूबिक मीटर अलग अलग तरह का मिनरल (खनिज) इस्तेमाल किया जाएगा। रॉक् फिल टाइप इस बांध में इंप्रेस मेटेरियल यानी क्ले (मिट्टी) लगभग 33.147 लाख क्यूबिक मीटर तथा परम इस मटेरियल में फिल्टर मटेरियल (रेत) की मात्रा 15.40 लाख क्यूबिक मीटर अनुमानित की गई है। डैम की मजबूती को बनाए रखने के लिए इस मटेरियल के अलावा रिप-रैप मटेरियल यानी मोटे-मोटे बोल्डर की अनुमानित मात्रा 13.698 लाख क्यूबिक मीटर है।

    यह बॉर्डर्स बाहर की ओर से डैम को सुरक्षा कवच की तरह मजबूती देंगे। इस प्रकार एग्रीगेट मटेरियल में रेत और बजरी आती है। इस बांध की दीवार के मजबूत निर्माण में 2 लाख क्यूबिक मीटर एग्रीगेट यानी रेत और बजरी और फाइन एग्रीगेट मटेरियल 3 लाख क्यूबिक मीटर लगाया जाना अनुमानित है। लगभग 5 लाख क्यूबिक मीटर कुल मटेरियल डैम के निर्माण में लगने की संभावना है। ऐसे में प्रदेश उद्योग विभाग के जियोलॉजिकल विंग यानी माइनिंग डिपार्टमेंट को एक मोटे राजस्व की भी उम्मीद बन गई है।

    अब आपको यह भी बता दें कि जो मिट्टी यानी क्ले डैम निर्माण में इस्तेमाल होगी उसकी लॉयल्टी 60 रूपये प्रति टन के हिसाब से वसूली जाएगी। माइनिंग डिपार्टमेंट बजरी पर 80 रूपये प्रति टन रॉयल्टी लेता है जबकि अन्य जैसे रेत और गोल्डर्स पर 100 और 80 रूपये प्रति टन रॉयल्टी लेता है। इस प्रकार यदि मोटा मोटा अनुमान लगाया जाए तो इस डैम के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले अलग-अलग खनिजों से प्रदेश के खनन विभाग को 200 करोड़ से अधिक की रॉयल्टी प्राप्त होने की पूरी संभावना है।

    उधर, राज्य भू-वैज्ञानिक माइनिंग डिपार्टमेंट पुनीत गुलेरिया का कहना है कि अगर राज्य को हर वर्ष डैम के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले खनिज से 25-30 करोड़ पर भी मिलता है तो यह भी बड़ी बात होगी। उन्होंने कहा कि जो अनुमानित रॉयल्टी बताई जा रही है वह एक साथ नहीं मिल सकती मगर जितना खनिज डैम निर्माण में लगेगा उसकी रॉयल्टी भी अच्छी प्राप्त होगी। उधर, एमडी एचपीपीसीएल अजय शर्मा ने बताया कि वह अभी विधानसभा के लिए जा रहे हैं। बावजूद इसके उन्होंने रेणुका डैम के टेक्निकल डाटा की पुष्टि करते हुए कहा कि सीडब्ल्यूसी के विजिट के बाद ड्राइंग में कुछ सुधार भी हो सकते हैं।

  • पर्यटकों को बड़ी राहत, रेणुका झील में फिर शुरू हुआ नौकायन

    पर्यटकों को बड़ी राहत, रेणुका झील में फिर शुरू हुआ नौकायन

    HNN / श्री रेणुका जी

    हिमाचल प्रदेश राज्य के सिरमौर ज़िले में रेणुका झील स्थित है। समुन्द्र तल से 672 मीटर की ऊँचाई पर स्थित, यह हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी झील है और इसकी परिधि 3,214 मीटर है। अब शरद ऋतु का पर्यटन सीजन शुरू हो चूका है। ऐसे में रेणुका झील में नौकायन की सुविधा भी बहाल कर दी गई है।

    बता दें कि 24 जनवरी 2022 को कोर्ट के आदेशों पर यहां नौकायन बंद कर दिया गया था। सुरक्षा मानकों पर खरा न उतरने के बाद कोर्ट ने ठेकेदार को नौकायन बंद करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद 11 महीने चली लंबी जद्दोजहद और मानकों को पूरा करने के बाद संबंधित ठेकेदार को फिर से इस कार्य का टेंडर अवार्ड कर दिया गया है। नौकायन शुरू होने से पर्यटकों को बड़ी राहत मिली है।

    बता दे कि रेणुका झील में नौकायन के लिए लोगों को प्रति नौकायन 350 रुपये की राशि देनी होगी। इस किराये में आधे घंटे तक नौकायन का लाभ दिया जाएगा। इस किराये में एक से चार लोग सफर तय कर पाएंगे। रेणुका विकास बोर्ड के सदस्य सचिव एवं एसडीएम नाहन रजनेश कुमार ने रेणुका झील में नौकायन संचालन को बहाल करने की पुष्टि की है।

  • श्री रेणुका जी डैम साइड विजिट के लिए कभी भी पहुंच सकती है सीडब्ल्यूसी की टीम

    श्री रेणुका जी डैम साइड विजिट के लिए कभी भी पहुंच सकती है सीडब्ल्यूसी की टीम

    फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए पेड़ों की गणना का स्टेज-2 कार्य भी शुरू

    HNN / श्री रेणुका जी

    बहुआयामी रेणुका जी बांध परियोजना निर्माण कार्य को जल्द पंख लगने शुरू हो जाएंगे। चुनावी आचार संहिता के चलते सीडब्ल्यूसी विजिट आजकल में कभी भी हो सकती है। सीडब्ल्यूसी श्री रेणुका जी बांध निर्माण में प्रधान सलाहकार है। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार केंद्रीय जल आयोग की टीम साइट विजिट के लिए कभी भी रेणुका जी पहुंच सकती है। बताना जरूरी है कि केंद्रीय जल आयोग टीम के आने का मुख्य उद्देश्य डैम निर्माण का डिजाइन ऑफ ड्राइंग बनाना है। सीडब्ल्यूसी टीम के इस कार्य के लिए हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन एलटीडी की ओर से सुंदरनगर की टीम भी श्री रेणुका जी बांध परियोजना साइड पर पहुंचेगी।

    गौरतलब हो कि यह टीम केंद्र से आने वाली सीडब्ल्यूसी की टीम को असिस्ट करेंगी। इस बहुआयामी रेणुका बांध परियोजना के निर्माण कार्य में अब कोई देरी ना हो इसको लेकर फॉरेस्ट क्लीयरेंस का कार्य भी पैरलल में चलाया जाने की कवायद भी शुरू हो चुकी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सबसे पहले फॉरेस्ट क्लीयरेंस लेना जरूरी माना गया है। हालांकि 2008 और 2009 में फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए पेड़ों की गणना की गई थी। मगर अब यह पौधे बड़े हो चुके हैं लिहाजा इनकी फिर से गिनती की जानी है।

    फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए पेड़ों की, की जाने वाली गणना में फॉरेस्ट की टीम रेवेन्यू तथा हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के अधिकारी भी शामिल रहेंगे। यह फॉरेस्ट क्लीयरेंस stage-2 मानी जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार डिजाइन और ड्राइंग के फाइनल हो जाने के बाद डैम निर्माण के लिए बिडिंग का कार्य शुरू हो जाएगा। फॉरेस्ट क्लीयरेंस के मिलते ही सबसे पहले गिरी नदी के पानी को डायवर्ट किया जाएगा। जिसके लिए सबसे पहला निर्माण तीन डायवर्जन टनल्स का होगा। यह डायवर्जन टनल करीब 1600 मीटर लंबी और इसका डाया करीब 10.5 मीटर का होगा।

    जैसे ही गिरी नदी का पानी बांध निर्माण स्थल से डायवर्ट होगा उसके साथ ही पानी रोकने के लिए डैम निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा। अच्छी बात तो यह है कि हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन डिजाइनिंग के साथ-साथ समानांतर में ही पेड़ों की गिनती का कार्य कर रहा है। वही,  जानकारी मिली है कि एचपीपीसीएल को मुआवजे के लिए माननीय न्यायालय से हुए आदेशों के बाद इस प्रक्रिया के लिए भी तमाम औपचारिकताएं पूरी कर ली गई है। असल में डैम प्रभावितों का मुआवजा प्रबंधन के द्वारा समय पर दे दिया जाना था।  

    मगर एचपीपीसीएल के पास फंड की कमी हो गई थी। यहां यह भी बताना जरूरी है कि इस डैम के निर्माण में 90 फ़ीसदी राशि केंद्र सरकार के द्वारा जबकि 10 फीसदी राज्य सरकार वहन करेगी। जान लेना जरूरी है कि इस बहुआयामी श्री रेणुका जी बांध परियोजना से प्रदेश को 40 मेगावाट बिजली, तो देश की राजधानी को 23 क्यूमेक्स पानी पीने के लिए मिलेगा। निर्माण स्थल पर बनाए जाने वाले बांध की ऊंचाई 148 मीटर के आसपास बताई जा रही है। रिवाइज हुए आंकलन के बाद इस बार निर्माण की लागत 7000 करोड़ से अधिक आंकी गई है।

    यही नहीं जो 24 किलोमीटर लंबी झील डैम बनने के बाद तैयार होगी, भगवान परशुराम सागर के नाम पर रखा जा चुका है। इस डैम के निर्माण में हिमाचल प्रदेश सहित हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली व राजस्थान की भी 10-10 फीसदी की हिस्सेदारी रहेगी। खबर की पुष्टि एमडी एचपीपीसीएल डॉक्टर अजय के द्वारा की गई है।

  • जुआ खेल रहे लोगों को पुलिस ने पकड़ा, मौके से ताश के पत्तों सहित बरामद की…

    जुआ खेल रहे लोगों को पुलिस ने पकड़ा, मौके से ताश के पत्तों सहित बरामद की…

    HNN / श्री रेणुका जी

    श्री रेणुका जी में पुलिस ने जुआ खेलते कुछ लोगों को पकड़ा है। पुलिस ने इन लोगों के कब्जे से 36,000 रूपये की नकद राशि बरामद की है। जानकारी के अनुसार श्री रेणुका जी पुलिस को सूचना मिली कि ददाहू क्षेत्र में अमित कुमार के 3 मंजिला मकान में कुछ लोग जुआ खेल रहे हैं।

    सूचना के आधार पर पुलिस ने बिना समय गवाएं तुरंत अमित कुमार के घर दबिश दी और इस दौरान देखा कि कुछ लोग जुआ खेल रहे थे। पुलिस टीम को सामने पाकर वहां जुआ खेल रहे लोगों में हड़कंप मच गया। इस दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ताश के पत्तों सहित 36000 रुपये की नकद राशि बरामद की। मामले की पुष्टि पुलिस अधीक्षक रमन कुमार मीणा ने की है।

  • विदेशी परिंदों से गुलजार हुआ रेणुकाजी वेटलैंड, हजारों मील दूरी तय कर पहुंचे..

    विदेशी परिंदों से गुलजार हुआ रेणुकाजी वेटलैंड, हजारों मील दूरी तय कर पहुंचे..

    HNN/ श्री रेणुका जी

    धार्मिक व पर्यटन केंद्र श्री रेणुका जी इन दिनों विदेशी परिंदों से गुलजार है। रेणुका जी वेटलैंड में इन दिनों पक्षी डेरा जमाए हुए हैं जो कि यहां आने वाले सैलानियों सहित श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए है। रेणुका जी वेटलैंड में इन दिनों सैंकड़ों की संख्या में प्रवासी पक्षी पहुंचे हुए हैं जैसे-जैसे मौसम में बदलाव हो रहा है पक्षियों की तादाद बढ़ती जा रही है।

    हजारों किलोमीटर लंबा सफर तय कर सैकड़ों प्रवासी परिंदों ने अभी तक रेणुका घाटी में अपना आशियाना बना लिया है। रेणुका झील में व इसके इर्द-गिर्द डेरा डाले यह प्रवासी पक्षी यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं व पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग इनका दीदार करने यहां पहुंचते हैं।

    पर्यटकों का कहना है, निश्चित तौर पर उनके लिए यह प्रवासी पक्षी एक बड़ा आकर्षण रहते हैं। बता दें, अब तक यूरेशियन कूट, यूरेशियन मूरहेन, इंटर मीडिएट इग्रेट, लिटिल कोर्मोरेंट, मैलार्ड, ग्रेट इग्रेट, ग्रेट कोर्मोरेंट, ग्रीन विंग टील सहित अन्य प्रजातियों के सैंकड़ों पक्षी यहाँ पहुँच चुके है। उधर, वन्य प्राणी विहार रेणुकाजी के आरओ नंदलाल ठाकुर ने बताया, अब तक कई प्रजातियों के सैकड़ों पक्षी झील में डेरा जमाए हुए हैं।

    उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे ठंड का प्रकोप बढ़ेगा वैसे-वैसे इन प्रवासी पक्षियों की संख्या में इजाफा होगा। उन्होंने बताया कि प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के लिए विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है।

  • दर्दनाक- ड्रिल मशीन से काम कर रहे युवक के साथ पेश आया दर्दनाक हादसा, ऐसे मिली मौत

    दर्दनाक- ड्रिल मशीन से काम कर रहे युवक के साथ पेश आया दर्दनाक हादसा, ऐसे मिली मौत

    HNN/ श्री रेणुका जी

    जिला सिरमौर में एक युवक की दर्दनाक मृत्यु हो गई है। इस दौरान ड्रिल मशीन की चपेट में आने से गले में मफलर कस गया जिस कारण दम घुटने के चलते युवक की मौत हो गई। मामला सिरमौर जिले के ददाहू के साथ सटे कटाह शीतला पंचायत के खैरी चांगन गांव का है।

    खैरी चांगन निवासी नरेश कुमार (25) बिजली बोर्ड के ठेकेदार के पास कार्यरत था। जब वह शेड में ड्रिल मशीन से काम कर रहा था तो अचानक गले में डाला मफलर मशीन में फंस गया। इसी दौरान युवक का दम घुटने लगा जिस कारण उसकी मौत हो गई।

    उधर, रेणुका थाने के एसएचओ रंजीत राणा ने हादसे की पुष्टि करते बताया कि सूचना मिलने के बाद पुलिस की टीम घटनास्थल पर पहुंची थी। पुलिस ने मृतक के शव को सिविल अस्पताल ददाहू से नाहन मेडिकल कॉलेज में पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। इसके साथ ही ठेकेदार के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

  • 15 दिन के भीतर होगा मुआवजे का भुगतान, कोर्ट के आदेश के बाद हरकत में आया रेणुका बांध प्रबंधन

    15 दिन के भीतर होगा मुआवजे का भुगतान, कोर्ट के आदेश के बाद हरकत में आया रेणुका बांध प्रबंधन

    HNN / श्री रेणुका जी

    अदालत के आदेश के बाद रेणुका बांध प्रबंधन हरकत में आ गया है। उन्होंने 15 दिन के भीतर एलएओ को संबंधित भू-मालिकों को राशि का भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने बीते शुक्रवार को रेणुका बांध प्रबंधन की संपत्ति अटैच करने के आदेश दिए हैं। यह राशि 42 करोड़ के करीब आंकी गई है। इसका भुगतान बांध प्रबंधन विस्थापितों को नहीं कर पाया है।

    विस्थापितों ने इस मामले को अदालत में चुनौती देने के साथ ही अपनी राशि का भुगतान करने की मांग की थी। अदालत ने फैसले की सुनवाई के दौरान रेणुका बांध प्रबंधन को फटकार लगाते हुए तमाम संपत्ति अटैच करने के आदेश जारी किए। लिहाजा, बांध प्रबंधन अगले ही दिन हरकत में आ गया और उन्होंने एलएओ से संपर्क साध कर आगामी दो सप्ताह के भीतर यह राशि संबंधित विस्थापितों को अदा करने को कह दिया है।

    बताया जा रहा है कि यह राशि भू-अर्जन अधिकारी शिमला की ओर से ही विस्थापितों को दी जानी है। इसको लेकर बांध प्रबंधन ने विशेष तौर पर भू-अर्जन अधिकारी को ई मेल भेजकर संबंधित भू-मालिकों की राशि अदा करने को कहा है।

  • रेणुका जी बांध प्रबंधन की तमाम संपत्ति होगी अटैच, कोर्ट ने सुनाया फैसला

    रेणुका जी बांध प्रबंधन की तमाम संपत्ति होगी अटैच, कोर्ट ने सुनाया फैसला

    मुआवजा न मिलने पर विस्थापितों ने अदालत में दी थी चुनौती

    HNN/ श्री रेणुका जी

    रेणुकाजी बांध परियोजना से जुड़े विस्थापितों के एक मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश सिरमौर की अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए बांध प्रबंधन की तमाम संपत्ति अटैच करने के आदेश जारी किए हैं। अदालत ने आगामी 7 दिनों के भीतर डैम प्रबंधन की तमाम संपत्ति की सूची सौंपने के लिए कहा है, ताकि इस संपत्ति से विस्थापितों के मुआवजे का भुगतान किया जा सके।

    जानकारी के अनुसार रेणुकाजी बांध में मर्ज होने वाले मौजा दीद-बगड़ के विस्थापितों के करीब 42 करोड़ रुपये के मुआवजे का भुगतान बांध प्रबंधन अभी तक नहीं कर पाया है। विस्थापितों ने इस मामले को अदालत में चुनौती दी थी। विस्थापितों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता एमपी कंवर ने बताया कि शुक्रवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान रेणुका बांध की तमाम संपत्ति अटैच करने के आदेश जारी किए गए हैं।

    इस मामले की अगली सुनवाई दो जनवरी को रखी गई है। रेणुकाजी बांध के महाप्रबंधक एमके कपूर ने बताया कि उन्हें अदालत के फैसले की फिलहाल कोई जानकारी नहीं है। मुआवजे के भुगतान की जिम्मेवारी भू-अर्जन अधिकारी (एलएओ) की है। भू-अर्जन अधिकारी से तुरंत संपर्क करके इस बारे में पूर्ण जानकारी ली जाएगी।