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  • हिमाचल में पटवारी-कानूनगो की हड़ताल जारी, सरकार के फैसले का इंतजार

    हिमाचल में पटवारी-कानूनगो की हड़ताल जारी, सरकार के फैसले का इंतजार

    संघ ने कहा – जब तक अधिसूचना रद्द नहीं होती , तब तक नहीं लौटेंगे काम पर

    हिमाचल प्रदेश में पटवारी-कानूनगो की हड़ताल फिलहाल समाप्त नहीं होगी। रविवार को गगल हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से बातचीत के बाद संयुक्त पटवारी-कानूनगो महासंघ ने वर्चुअल बैठक कर निर्णय लिया कि जब तक सरकार राज्य कैडर की अधिसूचना को रद्द करने का आधिकारिक पत्र जारी नहीं करती और महासंघ को वार्ता के लिए आमंत्रित नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

    सरकार से लिखित आश्वासन की मांग

    पटवारी-कानूनगो महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष सतीश चौधरी ने बताया कि बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि सिर्फ मौखिक आश्वासन से संतोष नहीं किया जाएगा। महासंघ ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के आश्वासन पर आभार व्यक्त किया, लेकिन स्पष्ट कर दिया कि जब तक सरकार राज्य कैडर की अधिसूचना को रद्द करने का पत्र जारी नहीं करती, तब तक कोई पटवारी या कानूनगो काम पर नहीं लौटेगा।

    महासंघ ने सरकार को दी सूचना

    इस बैठक में महासंघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजय कपूर, राज्य प्रेस सचिव युवराज नेगी और विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। महासंघ ने अपने फैसले से मुख्यमंत्री कार्यालय, राजस्व मंत्री, अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व), निदेशक भू-अभिलेख और सभी उपमंडलाधिकारियों को अवगत करवा दिया है।

    मुख्यमंत्री का आश्वासन और हड़ताल पर सरकार का रुख

    मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पहले ही पटवारी-कानूनगो महासंघ को भरोसा दे चुके हैं कि राज्य कैडर लागू होने से उनकी पदोन्नति प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी और सभी लाभ पूर्ववत मिलेंगे। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अन्य विभागों में भी यह व्यवस्था लागू की जा रही है, इसलिए राज्य कैडर अधिसूचना को रद्द नहीं किया जाएगा। वहीं, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने हड़ताली कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश भी जारी कर दिए हैं।

  • हिमाचल में हजारों अनुबंध कर्मी होंगे नियमित, विभागों ने शुरू की प्रक्रिया

    हिमाचल में हजारों अनुबंध कर्मी होंगे नियमित, विभागों ने शुरू की प्रक्रिया

    31 मार्च 2025 तक दो वर्ष पूरे करने वाले कर्मियों को मिलेगा नियमितीकरण का लाभ

    शिक्षा, स्वास्थ्य, जलशक्ति और लोकनिर्माण विभाग के कर्मियों को मिलेगा फायदा

    हिमाचल प्रदेश सरकार ने विभिन्न विभागों, निगमों और बोर्डों में कार्यरत अनुबंध कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 31 मार्च 2025 तक दो वर्ष का अनुबंध सेवाकाल पूरा करने वाले हजारों कर्मियों को इसका लाभ मिलेगा। शिक्षा, स्वास्थ्य, जलशक्ति और लोकनिर्माण विभाग में सबसे अधिक कर्मियों के नियमित होने की संभावना है। कार्मिक विभाग के निर्देशों के तहत, सभी विभाग अपने-अपने स्तर पर अनुबंध कर्मचारियों का श्रेणीवार ब्योरा इकट्ठा कर रहे हैं।

    नियमितीकरण की प्रक्रिया और शर्तें

    सरकार के निर्देशानुसार, 31 मार्च तक दो वर्ष का अनुबंध सेवाकाल पूरा करने वाले कर्मचारियों को नियमित किया जाएगा, लेकिन यह प्रक्रिया केवल उपलब्ध पदों के आधार पर ही होगी। कार्मिक विभाग ने स्पष्ट किया है कि नियमितीकरण के बाद कर्मियों का प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में तबादला संभव होगा। इसके लिए विभागीय स्तर पर एक कमेटी गठित की जाएगी, जो सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच करने के बाद नियमितीकरण को अंतिम रूप देगी।

    शिक्षा विभाग ने शुरू की डेटा संग्रह प्रक्रिया

    शिक्षा विभाग ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए सभी जिला उपनिदेशकों को पत्र जारी कर दिया है। इसमें दो वर्ष का अनुबंध सेवाकाल पूरा करने वाले शिक्षकों और गैर-शिक्षकों का श्रेणीवार रिकॉर्ड एकत्र करने के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में विभाग ने एक विशेष प्रारूप भी तैयार किया है, जिसे भरकर 20 मार्च तक शिक्षा निदेशालय को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

    अन्य विभाग भी जुटे प्रक्रिया में

    शिक्षा विभाग के अलावा, अन्य विभागों ने भी अपने कर्मचारियों का डेटा संकलन शुरू कर दिया है। सभी विभाग यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि पात्र कर्मचारियों की जानकारी सही समय पर संकलित हो, ताकि नियमितीकरण की प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सके

  • एचआरटीसी कर्मचारियों का सरकार के खिलाफ प्रदर्शन, अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

    एचआरटीसी कर्मचारियों का सरकार के खिलाफ प्रदर्शन, अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

    मांगें पूरी न होने पर 6 मार्च को होगा बड़ा फैसला

    हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के चालक-परिचालकों ने सरकार और निगम प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया। यूनियन का कहना है कि कर्मचारियों को केवल आश्वासन मिल रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा रहा।

    मांगों को दरकिनार करने का आरोप
    परिचालक यूनियन के राज्य उपाध्यक्ष नवीन ठाकुर ने बताया कि सरकार और निगम प्रबंधन लंबे समय से उनकी मांगों को अनदेखा कर रहा है, जिससे कर्मचारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार 6 मार्च तक कोई ठोस फैसला नहीं लेती, तो यूनियन आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होगी।

    शिमला में होगी उच्च स्तरीय बैठक
    यूनियन की एक उच्च स्तरीय बैठक 6 मार्च को राजधानी शिमला में आयोजित की जाएगी, जिसमें भविष्य की रणनीति तय की जाएगी। इस दौरान चालक और परिचालक यूनियन के प्रतिनिधि मुख्यमंत्री और निगम के प्रबंध निदेशक को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपेंगे।

    अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
    नवीन ठाकुर ने कहा कि अगर 6 मार्च तक उनकी मांगों पर कोई निर्णय नहीं लिया जाता, तो अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया जा सकता है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश की जनता से अपील करते हुए कहा कि यदि हड़ताल के कारण परिवहन सेवाएं प्रभावित होती हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और निगम प्रबंधन की होगी।

  • पटवारी और कानूनगो की हड़ताल को जनवादी संगठनों का समर्थन

    पटवारी और कानूनगो की हड़ताल को जनवादी संगठनों का समर्थन

    सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग, हड़ताल जारी

    नाहन, 4 मार्च – हिमाचल प्रदेश में पटवारी और कानूनगो की हड़ताल को अब जनवादी संगठनों का समर्थन मिल रहा है। सीटू जिला सिरमौर कमेटी के महासचिव आशीष कुमार और जनवादी महिला समिति की राज्य उपाध्यक्ष संतोष कपूर ने सोमवार को नाहन में हड़ताल कर रहे पटवारी और कानूनगो से मुलाकात कर उनके आंदोलन को समर्थन दिया।

    सरकार को समाधान निकालने की जरूरत – जनवादी संगठन

    सीटू महासचिव आशीष कुमार और महिला समिति उपाध्यक्ष संतोष कपूर ने कहा कि सरकार को पटवारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर उनकी वरिष्ठता (सिनियोरिटी) और प्रशिक्षण को राज्य स्तर पर लागू करने में आ रही चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए समाधान निकाला जाना चाहिए।

    राजस्व मंत्री और मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

    पटवारी एवं कानूनगो एसोसिएशन, जिला सिरमौर इकाई ने मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री को ज्ञापन भेजकर स्टेट कैडर की अधिसूचना के विरोध में अपनी आपत्ति दर्ज करवाई है। एसोसिएशन ने मांग की है कि इस अधिसूचना को तुरंत वापस लिया जाए।

    हड़ताल से प्रभावित हो रहा कामकाज

    पटवारी और कानूनगो की हड़ताल सोमवार को भी जारी रही, जिससे राजस्व विभाग से जुड़े कार्यों पर बुरा असर पड़ रहा है। आम जनता को जमीन से जुड़े मामलों और अन्य प्रशासनिक कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

  • मातृत्व अवकाश / महिला कर्मचारियों को विशेष मातृत्व अवकाश

    मातृत्व अवकाश / महिला कर्मचारियों को विशेष मातृत्व अवकाश


    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी सेवा में कार्यरत महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने उन महिलाओं को 60 दिन का विशेष मातृत्व अवकाश प्रदान करने की घोषणा की है, जो मृत शिशु को जन्म देती हैं या जन्म के तुरंत बाद अपने नवजात शिशु को खो देती हैं।

    मौजूदा नियम और नया संशोधन
    वर्तमान में सरकारी सेवा में कार्यरत महिलाओं को, यदि उनके दो से कम जीवित बच्चे हैं, तो प्रसव होने पर 180 दिनों के मातृत्व अवकाश का अधिकार प्राप्त है। हाल ही में घोषित यह विशेष मातृत्व अवकाश केवल उन मामलों में लागू होगा, जहां महिला को मृत शिशु जन्म देने या नवजात शिशु की मृत्यु का सामना करना पड़ता है। यह अवकाश केवल अधिकृत अस्पतालों में प्रसव के लिए मान्य होगा।

    सरकार की पहल का उद्देश्य
    राज्य सरकार इस पहल के माध्यम से उन महिलाओं को सहायता प्रदान करना चाहती है, जो ऐसी दुखद परिस्थितियों में शारीरिक और भावनात्मक रूप से प्रभावित होती हैं। इस विशेष अवकाश के जरिए उन्हें ठीक होने और उपचार के लिए आवश्यक समय मिल सकेगा।

    कर्मचारी कल्याण और कार्य-जीवन संतुलन
    इस निर्णय से सरकार अपने कर्मचारियों की भलाई को प्राथमिकता देते हुए कर्मचारी कल्याण और नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है। साथ ही, यह निर्णय कार्य-जीवन संतुलन को बढ़ावा देने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    राज्य सरकार का प्रगतिशील दृष्टिकोण
    हिमाचल प्रदेश सरकार इस नीति को लागू कर प्रगतिशील शासन की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को दोहराती है। यह पहल उन महिलाओं को महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करने का प्रयास है, जो मातृत्व के कठिन समय से गुजर रही हैं।

  • हिमाचल प्रदेश में बिजली बोर्ड कर्मियों का सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू

    हिमाचल प्रदेश में बिजली बोर्ड कर्मियों का सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू

    युक्तिकरण के फैसले से नाराज कर्मचारी , काले बिल्ले लगाकर कर रहे विरोध

    हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड के इंजीनियर और कर्मचारी सरकार के युक्तिकरण फैसले से नाराज होकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। राज्यभर में काले बिल्ले लगाकर काम किया जा रहा है और कर्मचारी वर्क टू रूल के तहत सेवाएं दे रहे हैं।

    इस विरोध के चलते सुबह 10 बजे से पहले और शाम 5 बजे के बाद कोई भी कर्मचारी इमरजेंसी सेवाएं नहीं देगा। वहीं, 11 दिसंबर को हमीरपुर में प्रदेशभर के बिजली बोर्ड कर्मी सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे। शिमला स्थित मुख्यालय सहित सभी विद्युत मंडलों व उपमंडलों में विरोध जारी है।

    अगर सरकार ने फैसला नहीं बदला , तो 24 फरवरी को सामूहिक छुट्टी

    बिजली बोर्ड के कर्मचारियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि युक्तिकरण की प्रक्रिया नहीं रोकी गई, तो 24 फरवरी को सभी कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर चले जाएंगे। इससे पूरे प्रदेश में बिजली सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

    अब सिर्फ 8 घंटे करेंगे काम

    हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड कर्मचारी संघ के महासचिव हीरा लाल वर्मा ने कहा कि कर्मचारियों ने वर्क टू रूल के तहत काम करने का फैसला लिया है।

    अब सभी कर्मचारी सिर्फ 8 घंटे की ड्यूटी करेंगे और इस अवधि के दौरान केवल निर्धारित कार्य ही किया जाएगा। निर्धारित समय के बाद कोई भी कर्मचारी अतिरिक्त सेवाएं नहीं देगा।

    सरकार के फैसले के खिलाफ जारी रहेगा विरोध

    हीरा लाल वर्मा ने कहा कि जब तक सरकार युक्तिकरण का फैसला वापस नहीं लेती, तब तक विरोध जारी रहेगा। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि अब तक किसी भी सरकार ने इस तरह के फैसले नहीं लिए थे। इसलिए बिजली बोर्ड के इंजीनियर और कर्मचारी काले बिल्ले लगाकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।

  • बिजली बोर्ड में कोई पद समाप्त नहीं , केवल युक्तिकरण किया जा रहा है

    बिजली बोर्ड में कोई पद समाप्त नहीं , केवल युक्तिकरण किया जा रहा है

    प्रवक्ता ने कर्मचारी संगठनों के आरोपों को किया खारिज

    बोर्ड की ओर से कोई पद समाप्त नहीं किया गया

    हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड के प्रवक्ता अनुराग पराशर ने स्पष्ट किया है कि बोर्ड में किसी भी पद को समाप्त नहीं किया गया है। उन्होंने कर्मचारी संगठनों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बोर्ड केवल हिमाचल प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के निर्देशों का पालन कर रहा है।

    बोर्ड की उच्च वेतन लागत को नियंत्रित करने का निर्देश

    प्रवक्ता ने बताया कि हिमाचल प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने बोर्ड से कर्मचारियों और पेंशनरों को मिलने वाली सैलरी और पेंशन खर्च कम करने को कहा है, क्योंकि बोर्ड का यह खर्च देश में सबसे अधिक 2.50 रुपए प्रति यूनिट है। आयोग बिजली दरें निर्धारित करता है और बोर्ड की वित्तीय स्थिति की लगातार समीक्षा कर रहा है। इसी के चलते आयोग ने बोर्ड को अपनी कर्मचारी लागत को कम करने के निर्देश दिए हैं।

    कुछ पदों का किया जा रहा है युक्तिकरण, नहीं की जा रही समाप्ति

    अनुराग पराशर ने स्पष्ट किया कि बोर्ड केवल कुछ श्रेणियों के पदों का युक्तिकरण कर रहा है, न कि उन्हें समाप्त कर रहा है। आवश्यकता पड़ने पर इन पदों पर दोबारा भर्ती की जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बोर्ड विद्युत वितरण कंपनी के रूप में कार्य कर रहा है, जबकि जेनरेशन विंग में अभी भी 2161 पद कार्यरत हैं। इनमें जेई, एसडीओ, एक्सईएन, एसई और चीफ इंजीनियर के पद शामिल हैं।

    उन्होंने बताया कि सिविल एसडीओ, जेई (सिविल), एसडीओ (इलेक्ट्रिक), जेई (इलेक्ट्रिक), एक्सन (इलेक्ट्रिक) और एसई (इलेक्ट्रिक) सहित कुछ पदों का समायोजन किया गया है। इसके अलावा मिस्त्री, डीजी ऑपरेटर, वेल्डर, टेलीफोन अटेंडेंट, गेज रीडर, कुक और फैरो प्रिंटर जैसे पदों की अब आवश्यकता नहीं रह गई है। इनकी जगह टी-मैट के पद भरे जाएंगे, जिससे बोर्ड को अधिक कुशलतापूर्वक कार्य करने में मदद मिलेगी।

    बोर्ड ने कर्मचारियों और पेंशनरों को जारी किए 134 करोड़ रुपए

    प्रवक्ता ने कहा कि कर्मचारी और अधिकारी बोर्ड की रीढ़ हैं, जो अपनी बहुमूल्य सेवाएं दे रहे हैं। उनकी सेवाओं को ध्यान में रखते हुए ही बोर्ड ने पिछले दो महीनों में डीए और संशोधित वेतनमान के एरियर के रूप में 134 करोड़ रुपए जारी किए हैं। यह राशि पिछले कई वर्षों में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में जारी की गई है।

    उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि आवश्यक सुधार नहीं किए गए तो बोर्ड की वित्तीय स्थिति गंभीर हो सकती है और भविष्य में एरियर देने में भी असमर्थता हो सकती है।

  • हिमाचल पुलिस में बड़ा फेरबदल : 54 कर्मचारियों के तबादले , बद्दी में 34 की तैनाती

    हिमाचल पुलिस में बड़ा फेरबदल : 54 कर्मचारियों के तबादले , बद्दी में 34 की तैनाती

    हिमाचल प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने किए 54 कर्मचारियों के तबादले

    पुलिस मुख्यालय ने जारी किए तबादला आदेश

    हिमाचल प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने 54 पुलिस कर्मचारियों के तबादले के आदेश जारी किए हैं। इनमें से 34 कर्मचारियों को पुलिस जिला बद्दी में तैनात किया गया है, जबकि बाकी 20 कर्मचारियों को अन्य जिलों और रिजर्व बटालियनों में भेजा गया है। ये तबादले विभागीय स्थापना समिति की सिफारिश पर किए गए हैं।

    बद्दी में तैनात किए गए पुलिस कर्मचारी

    बद्दी में स्थानांतरित किए गए कर्मचारियों में हेड कांस्टेबल बृज मोहन, कृष्ण सिंह, मनोज कुमार, जतिंद्र कुमार, गणेश राज, सुरेश कुमार, सतेंद्र सिंह, रवि कुमार, रविंद्र कुमार, कुलविंदर सिंह, अजय कुमार, विजय कुमार, सतीश सिंह और अनीता कुमारी शामिल हैं। ये सभी फिफ्थ आईआरबी से स्थानांतरित होकर बद्दी पहुंचे हैं।

    इसके अलावा, कांस्टेबल सुखविंद्र कौर (फर्स्ट बटालियन जुन्गा), गुरुबचन, राजेंद्र सिंह, दलवीर सिंह और राजेश कुमार (फर्स्ट आईआरबी) को बद्दी भेजा गया है। सिक्स्थ आईआरबी से कांस्टेबल सुखविंद्र, धर्मेंद्र, महेंद्र सिंह और विक्की सिंह को भी पुलिस जिला बद्दी में स्थानांतरित किया गया है।

    फर्स्ट बटालियन जुन्गा से हर्ष वर्धन, वीरेंद्र सिंह, कुलदीप सिंह, मनप्रीत सिंह, लखविंदर सिंह, जलज भारद्वाज, अमित भारद्वाज, रोहन कुमार और अमरीक सिंह को भी बद्दी में तैनात किया गया है।

    अन्य जिलों और बटालियनों में किए गए तबादले

    कुछ पुलिस कर्मचारियों को अन्य जिलों में तैनात किया गया है। इनमें कांस्टेबल अश्वनी और निक्की (लाहौल-स्पीति), विवेक (सैकेंड आईआरबी), चंपा देवी (ऊना), भरत भूषण (चंबा) और अंकुश पटियाल (पुलिस जिला देहरा) शामिल हैं। वहीं, कांस्टेबल श्वेता को राज्य विजिलेंस में भेजा गया है।

    हेड कांस्टेबल संजीव कुमार को पीटीसी डरोह और सुनील कुमार को फोर्थ आईआरबी में स्थानांतरित किया गया है। इसके अलावा, एचएचसी हुकुम सिंह को थर्ड आईआरबी, एचएएसआई इंद्र प्रकाश को चंबा और एचएचसी जी सिंह को फिफ्थ आईआरबी में तैनात किया गया है।

    एसडीआरएफ में तैनात किए गए कांस्टेबल

    हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग ने 4 कांस्टेबलों को एसडीआरएफ (स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स) में स्थानांतरित किया है। इनमें नवीन कुमार, शुभम, अमन ठाकुर और कुलदीप सिंह शामिल हैं।

  • पेंशनर्ज एसोसिएशन की नवगठित कार्यकारिणी ने पूर्व अध्यक्ष के बयान पर कड़ी आपत्ति दर्ज की

    पेंशनर्ज एसोसिएशन की नवगठित कार्यकारिणी ने पूर्व अध्यक्ष के बयान पर कड़ी आपत्ति दर्ज की

    राजगढ़ (सिरमौर) । जिला सिरमौर पेंशनर्ज वेलफेयर एसोसिएशन की नवगठित कार्यकारिणी ने पूर्व अध्यक्ष रामस्वरूप चौहान के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। कार्यकारिणी के अध्यक्ष ओमप्रकाश शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष रणवीर सिंह ठाकुर व नीरज चौहान तथा प्रेस सचिव रविदत्त भारद्वाज ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि जिला पेंशनर्ज वेलफेयर एसोसिएशन के चुनाव संवैधानिक रूप से संपन्न हुए हैं।

    संवैधानिक रूप से संपन्न हुए चुनाव

    नवगठित कार्यकारिणी ने स्पष्ट किया कि जिला कार्यकारिणी के चुनाव राज्य कार्यकारिणी द्वारा तय किए गए थे। तीन दिसंबर को मंडी में आयोजित बैठक में जिला सिरमौर की कार्यकारिणी के चुनाव का निर्णय लिया गया था। इसके तहत प्रदेश अध्यक्ष आत्माराम शर्मा ने वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरिदत्त शर्मा को चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने के लिए अधिकृत किया था, जिसका पत्र आठ दिसंबर को जारी हुआ था। उनकी देखरेख में ही यह चुनाव हुए, जो कि पेंशनर्ज वेलफेयर एसोसिएशन के संविधान के अनुरूप हैं।

    पूर्व अध्यक्ष पर लगाए आरोप

    नवगठित कार्यकारिणी ने कहा कि पूर्व अध्यक्ष रामस्वरूप चौहान अधिक उम्र के चलते मानसिक संतुलन खो चुके हैं और इस कारण वह भूल रहे हैं कि राज्य कार्यकारिणी की स्वीकृति के बिना कोई भी खंड या जिला इकाई वैध नहीं मानी जाती। उन्होंने कहा कि रामस्वरूप चौहान स्वयंभू जिला अध्यक्ष बने हुए हैं, जो किसी भी प्रकार से वैध नहीं है। ऐसे में उन्हें भ्रामक बयानबाजी से बचना चाहिए।

  • ओम प्रकाश शर्मा बने जिला सिरमौर पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष और…

    ओम प्रकाश शर्मा बने जिला सिरमौर पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष और…

    सर्व सम्मति से हुए चुनाव संपन्न महासचिव की जिम्मेवारी मिली प्रमोद गौतम को

    हिमाचल नाऊ न्यूज़ नाहन

    पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन जिला सिरमौर कार्यकारिणी के त्रैवार्षिक चुनाव में ओम प्रकाश शर्मा (नाहन) को अध्यक्ष पद की कमान सौंपी गई। जबकि, प्रमोद गौतम (सराहां) को महासचिव की जिम्मेदारी मिली।

    ये चुनाव सोमवार को जिला मुख्यालय नाहन में सर्वसम्मति से संपन्न हुए। एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष हरिदत्त शर्मा की देखरेख में आयोजित चुनाव प्रक्रिया के दौरान रणवीर सिंह ठाकुर (राजगढ़) को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, हीरा सिंह (शिलाई) और अमर सिंह ठाकुर (सराहां) को उपाध्यक्ष, अशोक कुमार (नाहन) को कोषाध्यक्ष, पीएन गुप्ता (राजगढ़) को मुख्य सलाहकार, सुंदर लाल मेहता (पांवटा साहिब) और कृष्ण दत्त शर्मा को सलाहकार चुना गया।

    इसके साथ साथ प्रेस सचिव का दायित्व रविदत्त भारद्वाज (राजगढ़) को सौंपा गया। तपेंद्र सिंह ठाकुर (संगड़ाह), कुंदन सिंह चौहान (शिलाई), हरिदत्त शर्मा (राजगढ़) और संतराम शर्मा (पांवटा साहिब) और रमेश सरैक को कार्यकारिणी में बतौर सदस्य नियुक्त किया गया।

    जबकि, रणदीप सिंह (संगड़ाह), बाबूराम शास्त्री (सराहां), एमआई खान (पांवटा साहिब) औरर इंद्र सिंह (राजगढ़) को राज्य कार्यकारिणी प्रतिनिधि नियुक्त किया गया.इस मौके पर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष आत्माराम शर्मा भी विशेष रूप से मौजूद रहे।

    इससे पूर्व एसोसिएशन की बैठक हुई, जिसमें चुनाव कराने पर सर्वसम्मति बनी। बैठक में राजगढ़, पांवटा साहिब, संगड़ाह, शिलाई और नौहराधार यूनिटों से 70 के करीब पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे।

    इस दौरान पेंशनरों की मांगों और समस्याओं पर भी विशेष मंथन किया गया। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष आत्माराम शर्मा ने कहा कि 2016 से 2022 के बीच के पेंशनरों का एरियर लंबित पड़ा है।

    इसके लिए आगामी बजट में प्रावधान कर अप्रैल माह से जारी किया जाए। इसके साथ साथ लंबे समय से अटके पेंशनरों के बिलों का भुगतान भी जल्द से जल्द किया जाए. उन्होंने कहा कि सरकार को 2 साल का कार्यकाल हो चुका है, लेकिन पेंशनरों को निराशा का सामना करना पड़ रहा है।

    यही नहीं 11 फीसदी डीए के साथ साथ पिछले डीए की किस्त का एरियर भी अबतक लंबित पड़ा है। उन्होंने ये भी मांग की कि पेंशनरों को उनका पक्ष सुनने से लिए आमंत्रित किया जाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री पेंशनरों के लिए आगामी बजट में उचित प्रावधान करेंगे।

     इस अवसर पर राज्य संगठन सचिव महेश वर्मा, राज्य कार्यकारिणी के सदस्य कर्म चंद, जीवन ठाकुर समेत दर्जनों पदाधिकारी और सदस्य ने अपनी  भागीदारी सुनिश्चित की।