Loading...

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने बद्दी में नकली दवा बनाने वाली कंपनी के मालिक की जमानत याचिका रद्द की

हिमाचलनाउ डेस्क • 24 Dec 2024 • 1 Min Read

नकली दवाओं की बरामदगी और समाज पर इसके प्रभाव को ध्यान में रखते हुए अदालत का फैसला

जमानत याचिका खारिज करने का फैसला

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने औद्योगिक क्षेत्र बद्दी में नकली दवाएं बनाने वाली एक कंपनी के मालिक की जमानत याचिका रद्द कर दी। न्यायाधीश विरेंद्र सिंह ने सोमवार को यह फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि इस मामले में भारी मात्रा में नकली दवाओं की बरामदगी अपराध की गंभीरता को स्पष्ट रूप से उजागर करती है। कोर्ट ने जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि यदि आरोपी को जमानत पर रिहा किया गया, तो यह समाज में गलत संदेश देगा कि ऐसे गंभीर अपराधों के बावजूद आरोपी आसानी से बाहर घूम सकता है।

नकली दवाओं के प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता

कोर्ट ने अपने आदेश में आगे कहा कि यह तथ्य कि नकली दवाओं का सेवन करने वालों पर इसका क्या असर पड़ सकता है, उसे मौजूदा स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले में सरकारी विश्लेषक और क्षेत्रीय औषधि परीक्षण प्रयोगशाला चंडीगढ़ की रिपोर्ट भी दवाओं की घटिया गुणवत्ता को साबित करती है। रिपोर्ट के मुताबिक, बरामद दवाएं नकली और घटिया थीं, जो समाज के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा हैं।

जमानत पर रिहाई से हो सकता था नकारात्मक संदेश

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी को जमानत पर रिहा करने से अन्य दवा निर्माताओं को भी घटिया और नकली दवाएं बनाने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता था। यह न केवल स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि यह उन लोगों के लिए भी नुकसानदायक है जो इन दवाओं का सेवन करते हैं और उनके स्वास्थ्य के प्रति विश्वास रखते हैं।

मामला क्या है?

यह मामला बद्दी में स्थित कंपनी ग्लेनमार्स हेल्थकेयर के मालिक अवेंद्र शुक्ला से जुड़ा हुआ है। शुक्ला ने 6 अक्टूबर, 2023 को ड्रग्स इंस्पेक्टर बद्दी द्वारा ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत पंजीकृत एक मामले में जमानत याचिका दायर की थी। जांच एजेंसी के अनुसार, शुक्ला की कंपनी ने 27 जनवरी, 2023 को लाइसेंस की समाप्ति के बावजूद एलोपैथिक दवाओं का कारोबार जारी रखा था। प्रयोगशाला की रिपोर्ट में यह पाया गया कि कंपनी द्वारा उत्पादित दवाएं घटिया और नकली गुणवत्ता की थीं।

आरोप और जांच

जांच एजेंसी ने बताया कि मेसर्स ग्लेनमार्स हेल्थकेयर से बरामद दवाएं नकली प्रकृति की थीं और शुक्ला एक फर्जी फर्म के नाम पर इन दवाओं का निर्माण कर रहा था। यह सब नकली दवाओं के निर्माण और विपणन में शामिल होने के आरोप में किया गया था। कोर्ट ने इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जमानत याचिका को रद्द कर दिया और आरोपी की रिहाई पर रोक लगा दी।

कोर्ट का संदेश

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का यह निर्णय एक मजबूत संदेश देता है कि समाज और स्वास्थ्य के लिए खतरे वाले अपराधों में किसी तरह की ढील नहीं दी जा सकती। अदालत ने साफ किया कि नकली दवाओं के कारोबार को लेकर कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि इस तरह के अपराधों को रोका जा सके और समाज को इससे बचाया जा सके।