मंडी में बादल फटने से बस स्टैंड डूबा, शिमला और कांगड़ा में भूस्खलन से जनजीवन अस्त-व्यस्त
मंडी में सोमवार देर रात बादल फटने से बस स्टैंड डूब गया और कई वाहन बह गए। निहरी में भूस्खलन से तीन लोगों की मौत और कांगड़ा में हाईवे बंद होने से सैकड़ों वाहन फंस गए।
मंडी।
धरमपुर में बादल फटा, बस स्टैंड डूबा
मंडी जिले के धरमपुर में सोमवार देर रात बादल फटने से तबाही मच गई। तेज बारिश के चलते पूरा बस स्टैंड जलमग्न हो गया। कई बसें और निजी वाहन बह गए। दुकानों और घरों में घुटनों तक पानी भर गया। सोन खड्ड का जलस्तर अचानक बढ़ने से लोगों को आधी रात को घरों से बाहर निकलकर छतों पर शरण लेनी पड़ी। घबराए लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागे, जिससे भगदड़ जैसे हालात बन गए। प्रशासन और पुलिस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंची और रातभर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। राहत टीमों ने नावों और रस्सियों की मदद से फंसे लोगों को बाहर निकाला।

निहरी में भूस्खलन, तीन की मौत
मंडी के निहरी क्षेत्र में भारी भूस्खलन से एक कच्चा मकान पूरी तरह ढह गया। मलबे में दबने से तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो लोगों को ग्रामीणों और बचाव दल ने काफी मशक्कत के बाद जिंदा बाहर निकाला। हादसे के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है।

कांगड़ा में हाईवे ठप, वाहनों की लंबी कतारें
पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग पर कांगड़ा एयरपोर्ट के पास बनूनी में भूस्खलन होने से सड़क पूरी तरह अवरुद्ध हो गई। हाईवे के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। मशीनरी लगाकर सड़क को साफ करने का कार्य जारी है, लेकिन मलबे की मात्रा अधिक होने के कारण बहाली में समय लग रहा है।

पूरे प्रदेश में हालात गंभीर
मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटों में जोगिंदरनगर में 56 मिमी, पालमपुर में 48 मिमी, पंडोह में 40 मिमी और कांगड़ा में 34 मिमी बारिश दर्ज की गई। राज्यभर में 493 सड़कें बंद पड़ी हैं, 352 ट्रांसफार्मर ठप हैं और 163 जल योजनाएं प्रभावित हैं।
मॉनसून से अब तक 409 मौतें
20 जून से अब तक मॉनसून सीजन में बादल फटने, भूस्खलन और सड़क हादसों में 409 लोगों की मौत हो चुकी है और 41 लोग लापता हैं। राज्य को अब तक 4,504 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। इस साल सामान्य से 44% अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है।