आउटसोर्स चालकों की सेवा बहाली का मुद्दा गरमाया, यूनियन ने दी आंदोलन की चेतावनी
सोमवार को हिमाचल प्रदेश के बिजली बोर्ड मुख्यालय, कुमार हाउस के बाहर 81 आउटसोर्स चालकों के समर्थन में एक धरना प्रदर्शन हुआ। इन चालकों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं, और अब आउटसोर्स कर्मचारी संघ ने चालकों की बहाली की मांग की है। यदि उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तो संघ ने राज्य स्तरीय प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
चालकों की सेवाएं समाप्त होने के बाद बढ़ा आक्रोश
आउटसोर्स कर्मचारियों की लामबंदी
सोमवार को राज्य बिजली बोर्ड आउटसोर्स इम्प्लाइज यूनियन ने बोर्ड मुख्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य 81 आउटसोर्स चालकों की सेवाओं की बहाली था। यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी शर्मा ने बताया कि 1 नवंबर 2024 से ये चालक बोर्ड से निकाले गए हैं, जबकि वे 12-13 वर्षों से बोर्ड में अपनी सेवाएं दे रहे थे। इस अचानक के निर्णय से कर्मचारियों में गहरी नाराज़गी और संशय का माहौल है।
संयुक्त मोर्चा का समर्थन
धरने में संयुक्त मोर्चा ने भी समर्थन दिया। मोर्चा के संयोजक लोकेश ठाकुर और सह संयोजक हीरा लाल वर्मा ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने इस फैसले पर दोबारा विचार करने का संकेत दिया है। बिजली बोर्ड प्रबंधन से 23 दिसंबर को वार्ता प्रस्तावित है, जिसमें इस मुद्दे पर चर्चा होगी।
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प्रबंधन से शीघ्र निर्णय की उम्मीद
बिजली बोर्ड प्रबंधन से देरी पर चिंता
वहीं, आउटसोर्स इम्प्लाइज यूनियन के राज्य अध्यक्ष अश्विनी शर्मा, सचिव राजेश चौहान और वरिष्ठ उपप्रधान पुनीत सोनी ने कहा कि यदि बोर्ड प्रबंधन ने समय रहते इन चालकों की सेवाएं बहाल नहीं कीं, तो 3100 आउटसोर्स कर्मचारियों को राज्यव्यापी आंदोलन की ओर बढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
संघ की चेतावनी
उन्हें डर है कि यदि जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला, तो यह आंदोलन एक बड़ी राज्यव्यापी हड़ताल में बदल सकता है, जिससे बिजली बोर्ड के कार्य में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
आगे का रास्ता
23 दिसंबर को होने वाली बैठक
23 दिसंबर को बिजली बोर्ड प्रबंधन और कर्मचारी-अभियंता मोर्चा के प्रतिनिधियों के बीच दूसरे दौर की बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में 81 आउटसोर्स चालकों की सेवाओं की बहाली पर चर्चा होने की संभावना है। सरकार ने इस पर पुनर्विचार करने का आश्वासन दिया है, लेकिन कर्मचारियों को त्वरित कार्रवाई की उम्मीद है।
निष्कर्ष
आउटसोर्स कर्मचारियों का कहना है कि यदि चालकों की सेवाएं तुरंत बहाल नहीं होतीं, तो यह कदम राज्यव्यापी आंदोलन में बदल सकता है। अब यह देखना होगा कि बिजली बोर्ड प्रबंधन इस मुद्दे का समाधान कैसे निकालता है।
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