Himachalnow / नाहन
गिरि पावर हाउस मे 50 से 10 मेगावाट पर आ सिमटा बिजली का उत्पादन
नाहनः प्रदेश की सबसे पहली गिरि पावर हाउस विद्युत परियोजना का बिजली उत्पादन काफी गिर गया है। 60 मेगावाट के पावर हाउस जहां 50 मेगावाट की बिजली बना रहा था, वहीं विंटर सीजन में पानी की कमी के चलते केवल 10 मेगावाट बिजली ही उत्पादन कर पा रहा है।
बिजली बोर्ड द्वारा लीन सीजन मानने की अर्थ
बिजली बोर्ड इसे लीन सीजन मानता है, जिसका अर्थ होता है सर्दियों के सीजन में पानी की कमी। हालांकि, इसे नुकसान की श्रेणी में नहीं रखा जाता। जब पानी की मात्रा ही कम हो गई है तो उत्पादन भी पानी के प्रवाह और स्टॉक के अनुसार ही होता है। ऐसे में यदि पानी भरपूर हो और जनरेशन नहीं हो पा रही हो तो लोस श्रेणी में रखा जाता है।
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गिरि पावर हाउस की क्षमता और पृष्ठभूमि
यहां ये भी बताया जरूरी है कि गिरि पावर हाउस 60 मेगावाट बिजली बनाने की क्षमता रखता है, जिसके पास दो टरबाइन हैं। ये पावर हाउस 70 के दशक का बना हुआ है। पूर्व में जिला से ताल्लुक रखने वाले पूर्व उर्जा मंत्री सुखराम चौधरी ने अपने कार्यकाल के दौरान इस पावर हाउस के जीर्णोंद्धार के लिए 439 करोड़ रुपये की डीपीआर भी बनाई थी। इसके तहत इस पूरे हाउस का आधुनिकीकरण होना था। अभी तक डीपीआर के बाद इस पावर हाउस के लिए बजट का प्रावधान नहीं हो पाया है। बिजली के कम उत्पादन के चलते मौजूदा समय में उत्तराखंड के खोदरी माजरी और पंजाब से बिजली की आपूर्ति की जा रही है।
बरसातों के दौरान बढ़ता बिजली उत्पादन
ऐसे में बरसातों के दौरान इस पावर हाउस से बिजली का उत्पादन फिर से बढ़ जाता है और यहां की बिजली को बाहरी राज्यों को दिया जाता है। कुल मिलाकर कहा जाए तो यह सारा सिस्टम योजनाबद्ध तरीके से चलता है, जिसमें बिजली के उत्पादन की कमी को आपस में टाईअप करके नुकसान रहित बनाया जाता है।
अधीक्षण अभियंता जनरेशन का बयान
उधर, अधीक्षण अभियंता जनरेशन आरएस ठाकुर ने बताया कि गिरि नदी में पानी की कमी के चलते पावर हाउस की क्षमता 50 मेगावाट से घटकर 10 मेगावाट पर आ गई है। हालांकि, ये पावर हाउस 60 मेगावाट का है, लेकिन लंबे अरसे से पुरानी पड़ चुकी मशीनरी की वजह से पीक सीजन में इसका उत्पादन 50 मेगावाट रहता है। मौजूदा समय में एक टरबाइन से बिजली उत्पादन किया जा रहा है। दूसरी टरबाइन मैंटेनेंस पर है।
50 से 10 मेगावाट पर आ सिमटा बिजली का उत्पादन
नाहनः प्रदेश की सबसे पहली गिरि पावर हाउस विद्युत परियोजना का बिजली उत्पादन काफी गिर गया है। 60 मेगावाट के पावर हाउस जहां 50 मेगावाट की बिजली बना रहा था, वहीं विंटर सीजन में पानी की कमी के चलते केवल 10 मेगावाट बिजली ही उत्पादन कर पा रहा है।
बिजली बोर्ड द्वारा लीन सीजन मानने की अर्थ
बिजली बोर्ड इसे लीन सीजन मानता है, जिसका अर्थ होता है सर्दियों के सीजन में पानी की कमी। हालांकि, इसे नुकसान की श्रेणी में नहीं रखा जाता। जब पानी की मात्रा ही कम हो गई है तो उत्पादन भी पानी के प्रवाह और स्टॉक के अनुसार ही होता है। ऐसे में यदि पानी भरपूर हो और जनरेशन नहीं हो पा रही हो तो लोस श्रेणी में रखा जाता है।
गिरि पावर हाउस की क्षमता और पृष्ठभूमि
यहां ये भी बताया जरूरी है कि गिरि पावर हाउस 60 मेगावाट बिजली बनाने की क्षमता रखता है, जिसके पास दो टरबाइन हैं। ये पावर हाउस 70 के दशक का बना हुआ है। पूर्व में जिला से ताल्लुक रखने वाले पूर्व उर्जा मंत्री सुखराम चौधरी ने अपने कार्यकाल के दौरान इस पावर हाउस के जीर्णोंद्धार के लिए 439 करोड़ रुपये की डीपीआर भी बनाई थी। इसके तहत इस पूरे हाउस का आधुनिकीकरण होना था। अभी तक डीपीआर के बाद इस पावर हाउस के लिए बजट का प्रावधान नहीं हो पाया है। बिजली के कम उत्पादन के चलते मौजूदा समय में उत्तराखंड के खोदरी माजरी और पंजाब से बिजली की आपूर्ति की जा रही है।
बरसातों के दौरान बढ़ता बिजली उत्पादन
ऐसे में बरसातों के दौरान इस पावर हाउस से बिजली का उत्पादन फिर से बढ़ जाता है और यहां की बिजली को बाहरी राज्यों को दिया जाता है। कुल मिलाकर कहा जाए तो यह सारा सिस्टम योजनाबद्ध तरीके से चलता है, जिसमें बिजली के उत्पादन की कमी को आपस में टाईअप करके नुकसान रहित बनाया जाता है।
अधीक्षण अभियंता जनरेशन का बयान
उधर, अधीक्षण अभियंता जनरेशन आरएस ठाकुर ने बताया कि गिरि नदी में पानी की कमी के चलते पावर हाउस की क्षमता 50 मेगावाट से घटकर 10 मेगावाट पर आ गई है। हालांकि, ये पावर हाउस 60 मेगावाट का है, लेकिन लंबे अरसे से पुरानी पड़ चुकी मशीनरी की वजह से पीक सीजन में इसका उत्पादन 50 मेगावाट रहता है। मौजूदा समय में एक टरबाइन से बिजली उत्पादन किया जा रहा है। दूसरी टरबाइन मैंटेनेंस पर है।
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