शिमला। हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित गुड़िया दुष्कर्म और हत्या मामले में दोषी चिरानी नीलू ने शिमला जिला अदालत के आजीवन कारावास के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान दोषी पक्ष के वकील ने सबूतों और नमूनों से छेड़छाड़ का आरोप लगाया।
क्या कहा अदालत ने?
- हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी शामिल हैं, ने सुनवाई के दौरान पूछा,”ऐसा कौन सा कारण है, जिससे दोषी व्यक्ति अपने आप को निर्दोष साबित कर सके?“
- अदालत ने दोषी के पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी भी मांगी।
दोषी के वकील ने क्या दी दलीलें?
- वकील ने बताया कि नीलू को सिरमौर कोर्ट ने हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा दी थी, जिसे हाईकोर्ट ने घटाकर 10 साल कर दिया था।
- उन्होंने दावा किया कि सीबीआई ने गिरफ्तारी में देरी की।
- 5 जुलाई 2017 को घटना के बाद, 12 अप्रैल 2018 तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई।
- आरोपी की मां का डीएनए मैच होने के एक साल बाद, 13 अप्रैल 2018 को आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
- वकील ने यह भी कहा कि सीबीआई ने 250 लोगों के खून के नमूने जांच के लिए लिए थे, लेकिन इनमें छेड़छाड़ हुई है।
क्या है मामला?
- वर्ष 2017 में शिमला के कोटखाई क्षेत्र में स्कूली छात्रा गुड़िया के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना सामने आई थी।
- सीबीआई जांच के बाद नीलू चिरानी को दोषी ठहराया गया और जिला अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
आगे की सुनवाई कब?
- अदालत ने फैसला किया है कि अब दो दिन लगातार दोपहर 3 बजे के बाद सुनवाई होगी।
- मंगलवार को दोषी पक्ष के अधिवक्ता अपनी अंतिम दलीलें पेश करेंगे।
गौरतलब है कि इस मामले ने हिमाचल में कानून व्यवस्था और जांच प्रणाली पर कई सवाल उठाए थे। अब हाईकोर्ट का फैसला तय करेगा कि दोषी की सजा पर क्या रुख अपनाया जाता है।
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