हिमाचल प्रदेश में चिट्टा (सिंथेटिक ड्रग्स) तस्करी के खिलाफ सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विधानसभा में ऐलान किया कि 60 सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों पर जल्द ही बड़ी कार्रवाई होगी।
एंटी ड्रग एक्ट होगा लागू, सख्त कानून की तैयारी
सीएम सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार इस सत्र में एंटी ड्रग एक्ट को सदन में पेश करेगी। इस एक्ट के लागू होते ही ड्रग तस्करी में लिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई संभव होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोषियों को बचाने वाले राजनेताओं, अधिकारियों और अन्य लोगों पर भी शिकंजा कसा जाएगा।
नशा करने वालों की मैपिंग और स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान
सीएम ने बताया कि पंचायत स्तर पर नशा करने वालों की पूरी मैपिंग कर ली गई है और अब उन्हें नशे से बाहर निकालने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके अलावा, स्कूलों और कॉलेजों में भी यह मैपिंग की जाएगी ताकि ड्रग्स के नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ा जा सके। शैक्षणिक पाठ्यक्रम में भी नशा विरोधी जागरूकता को शामिल किया जाएगा।
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विधानसभा में नशे के मुद्दे पर जोरदार हंगामा
बुधवार को विधानसभा सत्र के दौरान चिट्टे के बढ़ते मामलों पर जमकर हंगामा हुआ। भाजपा विधायक डीएस ठाकुर ने मांग की कि 1 ग्राम चिट्टे के साथ पकड़े जाने वाले को जमानत नहीं मिलनी चाहिए। वहीं, कांग्रेस विधायक मलेंद्र राजन ने सुझाव दिया कि जिन क्षेत्रों में चिट्टे के मामले ज्यादा हैं, वहां पुलिस स्टाफ में बदलाव किया जाए।
नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “उड़ता पंजाब सुना था, अब रेंगता हिमाचल दिख रहा है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सिर्फ आंकड़ों के आधार पर ड्रग्स के मामलों में कमी का दावा कर रही है, जबकि हकीकत में हालात गंभीर बने हुए हैं।
सीएम सुक्खू का पलटवार
मुख्यमंत्री सुक्खू ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि “पूर्व सरकार ने NDPS एक्ट को सख्ती से लागू नहीं किया था, इसलिए अब इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।” उन्होंने दावा किया कि जबसे कांग्रेस सरकार आई है, ड्रग्स के कारोबार में 30% की कमी आई है।
सुक्खू ने कहा कि सरकार अब ड्रग्स सप्लायर्स पर शिकंजा कसने के लिए एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि सोलन के कोटला बेहड़ में 150 बीघा भूमि पर नशा निवारण केंद्र स्थापित किया जा रहा है।
अगले कदम और सख्त कार्रवाई की तैयारी
सरकार अब हाईकोर्ट से जमानत लेने वाले ड्रग्स तस्करों पर भी नियंत्रण करने के लिए कानूनी रणनीति बना रही है। इसके तहत ड्रग्स सप्लायर्स को 6 से 9 महीने तक जमानत न मिलने की नीति अपनाई जा रही है।
सरकार के इन सख्त कदमों से हिमाचल प्रदेश में ड्रग्स माफिया पर नकेल कसने की कोशिश की जा रही है। अब यह देखना होगा कि विधानसभा में पेश होने वाला नया एंटी ड्रग एक्ट राज्य में नशा तस्करी पर कितनी प्रभावी रोक लगा पाता है।
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