हिमाचल प्रदेश में बागवानों के लिए सिंबीडियम ऑर्किड की खेती एक लाभदायक विकल्प बन रही है। पहले यह पौधा सिक्किम, मेघालय, और शिलॉन्ग जैसे पूर्वोत्तर क्षेत्रों में उगाया जाता था, लेकिन अब इसे हिमाचल के कुछ हिस्सों में भी सफलतापूर्वक उगाया जा रहा है।
ऑर्किड की खेती के लिए अनुकूल वातावरण
- प्रकाश व्यवस्था: सिंबीडियम ऑर्किड को पूरी धूप की आवश्यकता नहीं होती। इसे 50% शेड नेट हाउस में लगाया जाता है, जहां पर्याप्त हवादार स्थान और नियंत्रित धूप मिलती है।
- जड़ प्रणाली: इसकी जड़ें एरियल होती हैं, जो हवा से नमी और पोषक तत्वों को अवशोषित करती हैं। इसलिए, मिट्टी की बजाय इसे हल्के, हवादार माध्यम में लगाया जाता है।
उगाने के लिए आवश्यक सामग्री
- कोकोपीट और कोको चिप्स: नारियल के खोल से तैयार किया जाता है, जो पौधे की जड़ों को नमी और पोषण देता है।
- पेड़ों की छाल (बार्क): विशेषकर बाणों की छाल उपयुक्त रहती है, जो जड़ों के लिए हवादार माध्यम बनाती है।
- ईंट के टुकड़े: गमले में सबसे नीचे दो इंच की परत में रखे जाते हैं, ताकि पानी का निकास सही तरीके से हो सके।
- कोयला: यह माध्यम को संक्रमण से बचाने में मदद करता है।
- लीफ मोल्ड: जंगल की मिट्टी का उपयोग किया जाता है, जिससे अतिरिक्त पोषक तत्व मिलते हैं।
तैयारी की विधि
- सबसे पहले गमले में ईंटों के टुकड़ों की परत बिछाई जाती है।
- फिर कोयले के टुकड़े, मिट्टी के टूटे गमले, और बार्क डाले जाते हैं।
- इसके बाद कोकोपीट और कोको चिप्स का मिश्रण रखा जाता है।
- अंत में, लीफ मोल्ड डालकर माध्यम को तैयार किया जाता है।
देखभाल के टिप्स
- अत्यधिक पानी देने से बचें, क्योंकि इसकी जड़ें ज्यादा नमी नहीं सह पातीं।
- पौधे को नियमित रूप से हल्की धूप और हवादार स्थान में रखें।
- पौधे को पोषक तत्व देने के लिए समय-समय पर ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर का इस्तेमाल करें।
निष्कर्ष: यदि सही तरीके से तैयारी की जाए, तो सिंबीडियम ऑर्किड की खेती हिमाचल में किसानों के लिए एक सफल और लाभकारी व्यवसाय बन सकती है।
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