बिलासपुर। गोबिंद सागर झील में जलस्तर तेजी से घटने के कारण हाल ही में शुरू की गई वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां बंद करनी पड़ी हैं। झील के जलस्तर में गिरावट और बढ़ते दलदल के कारण राज्य स्तरीय रिवर राफ्टिंग प्रतियोगिता भी रद्द कर दी गई है।
पर्यटन और व्यवसाय पर पड़ा असर
- झील में वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां शुरू होने से स्थानीय व्यवसायियों और पर्यटकों को उम्मीद थी कि रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
- लेकिन जलस्तर कम होते ही पैरासेलिंग, स्पीड बोटिंग, क्रूज, शिकारा और जेटी राइड्स पूरी तरह ठप हो गई हैं।
- वाटर स्पोर्ट्स कंपनी के एमडी अजय हांडा के अनुसार,”झील में पानी का स्तर कम होने से कंपनी को हर माह करीब 10 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। झील में पानी भरने के बाद ही गतिविधियां फिर से शुरू की जाएंगी।“
- पर्यटकों की कमी से बिलासपुर में पर्यटन व्यवसाय भी प्रभावित हुआ है।
रिवर राफ्टिंग प्रतियोगिता भी रद्द
- 9 मार्च को गोबिंद सागर झील में प्रदेश स्तरीय रिवर राफ्टिंग प्रतियोगिता प्रस्तावित थी।
- इस प्रतियोगिता में प्रदेश की आठ टीमों ने भाग लेना था।
- जलस्तर कम होने के चलते अब एसोसिएशन प्रतियोगिता के लिए दूसरे स्थान की तलाश में है।
बैराज निर्माण की योजना लंबित
- झील में सालभर जलस्तर बनाए रखने के लिए बैराज निर्माण की योजना कई वर्षों से लंबित है।
- पूर्व भाजपा सरकार ने 1500 करोड़ रुपये की परियोजना में मंडी भराड़ी पुल से लुहणू तक बैराज बनाने की योजना रखी थी।
- लेकिन सरकार बदलने के बाद यह योजना कागजों तक सीमित रह गई।
- स्थानीय व्यवसायियों का कहना है कि:”यदि बैराज का निर्माण जल्द नहीं हुआ, तो आने वाले समय में झील और तेजी से सूखेगी। ऐसे में वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां सिर्फ दो से तीन माह ही चल पाएंगी।“
कई व्यवसायी प्रभावित
- झील का जलस्तर कम होने से शिकारा और बोट ऑपरेटरों समेत कई छोटे व्यवसायी भी प्रभावित हुए हैं।
- वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों के रुकने से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ा है।
यदि बैराज का निर्माण नहीं हुआ, तो गोबिंद सागर झील का पर्यटन व्यवसाय आगे और अधिक संकट में पड़ सकता है।
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