Month: February 2025

  • किन्नौर में अप्रैल से शुरू होगी आर्थिक जनगणना 2025-26

    किन्नौर में अप्रैल से शुरू होगी आर्थिक जनगणना 2025-26

    घरेलू उद्यमों और प्रतिष्ठानों को किया जाएगा शामिल, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी डेटा प्रक्रिया

    किन्नौर के उपायुक्त डॉ. अमित कुमार शर्मा ने जानकारी दी कि आर्थिक जनगणना 2025-26 के तहत अप्रैल माह से किन्नौर जिले में जनगणना कार्य शुरू किया जाएगा। यह प्रक्रिया जिला सांख्यिकी विभाग द्वारा संचालित होगी और यह आर्थिक जनगणना की 8वीं रिपोर्ट होगी।

    उपायुक्त ने बताया कि राज्य स्तरीय समिति के आदेशानुसार इस कार्य को चरणबद्ध रूप से पूरा किया जाएगा। इस जनगणना में घरेलू उद्यमों सहित सभी प्रतिष्ठानों को शामिल किया जाएगा, ताकि जिले में आर्थिक गतिविधियों का व्यापक डेटा संकलित किया जा सके।

    डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से होगी जनगणना प्रक्रिया

    इस बार आर्थिक जनगणना के लिए आईटी आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा। इसमें डेटा कैप्चर, सत्यापन, रिपोर्ट निर्माण और सूचना प्रसार को डिजिटल रूप से प्रबंधित किया जाएगा। यह तकनीक जनगणना प्रक्रिया को अधिक सटीक और तेज़ बनाने में मदद करेगी।

    एन्यूमेरेटर और सुपरवाइजर की तैनाती

    इस जनगणना कार्य के लिए एन्यूमेरेटर और सुपरवाइजर की तैनाती की जाएगी, जिसमें –

    • आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और आशा वर्कर को एन्यूमेरेटर के रूप में नियुक्त किया जाएगा।
    • पटवारी, पंचायत सचिव और पंचायत सहायक को सुपरवाइजर की भूमिका दी जाएगी।

    यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी क्षेत्रों में संगठित और असंगठित क्षेत्रों के आर्थिक उपक्रमों की सही जानकारी एकत्र की जा सके।

    मोबाइल ऐप के माध्यम से होगा डेटा संकलन

    इस बार आर्थिक जनगणना की पूरी प्रक्रिया मोबाइल ऐप के माध्यम से संचालित की जाएगी। इससे डिजिटल डेटा संग्रहण और त्वरित विश्लेषण संभव होगा, जिससे जिला प्रशासन को सटीक और अद्यतन जानकारी प्राप्त हो सकेगी।

    आर्थिक जनगणना से प्राप्त डेटा का उपयोग नीतिगत योजनाओं के निर्माण में किया जाएगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिलेगी।

  • संगड़ाह महाविद्यालय में सांस्कृतिक समारोह, छात्रों ने प्रस्तुत किए शानदार कार्यक्रम

    संगड़ाह महाविद्यालय में सांस्कृतिक समारोह, छात्रों ने प्रस्तुत किए शानदार कार्यक्रम

    कला और संस्कृति का संगम, पारंपरिक और आधुनिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

    संगड़ाह – राजकीय महाविद्यालय संगड़ाह में केंद्रीय छात्र परिषद द्वारा भव्य सांस्कृतिक समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह की अध्यक्षता छात्र परिषद अध्यक्ष पूनम ने की, जबकि प्राचार्या डॉ. मीनू भास्कर इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रहीं।

    छात्रों की शानदार प्रस्तुतियों से महाविद्यालय में छाया सांस्कृतिक रंग

    कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया।

    • सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
    • नाटी और पहाड़ी गीतों ने पारंपरिक संस्कृति को जीवंत कर दिया।
    • ग़ज़ल और शास्त्रीय नृत्य ने माहौल को संगीतमय बना दिया।
    • देशभक्ति गीतों ने सभी के भीतर देशप्रेम की भावना को जागृत किया।
    • युगल नृत्य और अन्य मनोरंजक प्रस्तुतियों ने पूरे कार्यक्रम को ऊर्जावान बना दिया।

    टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ भी बना हिस्सा

    इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षण (टीचिंग) और गैर-शिक्षण (नॉन-टीचिंग) स्टाफ के सदस्य भी उपस्थित रहे, जिन्होंने छात्रों की प्रस्तुतियों की सराहना की और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।

    यह सांस्कृतिक समारोह छात्रों की कला प्रतिभा को निखारने और उनकी रचनात्मकता को मंच प्रदान करने का एक बेहतरीन अवसर साबित हुआ।

  • ऊना में ‘स्वच्छ शहर-समृद्ध शहर’ अभियान के तहत वेस्ट-टू-कंपोस्ट प्रणाली को बढ़ावा

    ऊना में ‘स्वच्छ शहर-समृद्ध शहर’ अभियान के तहत वेस्ट-टू-कंपोस्ट प्रणाली को बढ़ावा

    कृषि उपज मंडी समिति के साथ बैठक, कचरा निस्तारण और खाद बनाने पर जोर

    ऊना नगर निगम ने वेस्ट-टू-कंपोस्ट प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए मंगलवार को कृषि उपज मंडी समिति ऊना के पदाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। बैठक में गीले कचरे से खाद बनाने और सूखे एवं हानिकारक कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के महत्व पर चर्चा की गई।

    नगर निगम ऊना के आयुक्त एवं अतिरिक्त उपायुक्त महेंद्र पाल गुर्जर ने जानकारी देते हुए बताया कि ठोस कचरा प्रबंधन नियम-2016 के तहत जो संस्थान या व्यवसाय रोजाना 50 किलोग्राम या इससे अधिक कचरा उत्पन्न करते हैं, उन्हें अपने स्तर पर सूखा और गीला कचरा अलग-अलग कर उसका निस्तारण करना अनिवार्य होगा।

    वेस्ट-टू-कंपोस्ट प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान

    महेंद्र पाल गुर्जर ने बताया कि नगर निगम ऊना बल्क वेस्ट जनरेटरों के साथ बैठकें करेगा, जिनमें –

    • सब्जी मंडियां
    • होटल
    • ढाबे
    • रेस्ट हाउसेज
    • अस्पताल

    शामिल होंगे। इन बैठकों के माध्यम से गीले, सूखे और हानिकारक कचरे को सही ढंग से अलग करने और वैज्ञानिक निस्तारण के तरीकों की जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि वेस्ट-टू-कंपोस्ट प्रणाली से न केवल कचरे का सही उपयोग होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को भी बढ़ावा मिलेगा।

    स्वच्छता को लेकर संयुक्त प्रयास आवश्यक

    इस बैठक में कृषि उपज मंडी समिति के सचिव ठाकुर भूपिंदर सिंह, नगर निगम के सफाई पर्यवेक्षक विजय कुमार, अर्बन प्लानर अंजू सोनी, सुशील गुप्ता, अभिषेक पठानिया, बबली और अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

    स्वच्छता अभियान को प्रभावी बनाने के लिए नगर निगम ऊना स्थानीय व्यवसायों और आम नागरिकों को भी जागरूक करने की योजना बना रहा है, जिससे सभी मिलकर स्वच्छ और समृद्ध शहर बनाने की दिशा में योगदान दे सकें।

  • जीवन लाल की प्रेरणादायक सफलता : मत्स्य पालन से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल

    जीवन लाल की प्रेरणादायक सफलता : मत्स्य पालन से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल

    कड़ी मेहनत और सरकारी योजनाओं से पाया आर्थिक समृद्धि का मुकाम

    ऊना जिले के गोंदपुर बनेहड़ा गांव के जीवन लाल ने यह साबित कर दिया कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से कोई भी सफलता प्राप्त कर सकता है। पारंपरिक कृषि से अलग हटकर उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत मछली पालन को अपनाया और आज एक सफल मत्स्य उद्यमी के रूप में पहचान बना चुके हैं।

    सिर्फ दो वर्षों के भीतर, उन्होंने 2.2 लाख रुपये के शुरुआती मुनाफे से आगे बढ़ते हुए इस वर्ष 7.6 लाख रुपये तक के लाभ की उम्मीद की है। उनकी यह सफलता न केवल उनकी खुद की आर्थिक स्थिति में सुधार लाई है, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों और युवाओं के लिए भी एक प्रेरणादायक कहानी बन गई है।

    सरकारी योजनाओं से मिला सहयोग , मुख्यमंत्री सुक्खू सरकार का मत्स्य पालन को बढ़ावा

    हिमाचल प्रदेश के मत्स्य पालन विभाग के निदेशक विवेक चंदेल ने बताया कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार मत्स्य पालन को स्वरोजगार का साधन बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है।

    इसके लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनमें –

    • प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत 40% से 60% तक की सब्सिडी दी जा रही है।
    • मुख्यमंत्री कार्प मत्स्य पालन योजना, जिसमें किसानों को 80% तक की सब्सिडी का लाभ मिल रहा है।

    कैसे हुई सफलता की शुरुआत?

    जीवन लाल ने वर्ष 2023-24 में 0.3450 हेक्टेयर भूमि पर मछली पालन की शुरुआत की। उन्हें सरकार से 1.71 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई, जिससे उन्होंने मत्स्य पालन की बुनियादी संरचना तैयार की।

    सही रणनीति और परिश्रम से उन्होंने पहली ही फसल में 2.2 लाख रुपये का लाभ अर्जित किया। इस सफलता के बाद उन्होंने मत्स्य पालन का विस्तार करने का निर्णय लिया और 2024-25 में अतिरिक्त तालाब किराए पर लेकर उत्पादन बढ़ाया

    मत्स्य पालन में नवाचार और बढ़ता रोजगार

    जीवन लाल ने परंपरागत तरीकों की बजाय नई तकनीकों और नवाचारों को अपनाया । उन्होंने –

    • छोटे लेकिन प्रभावी तालाबों का निर्माण किया, जिन्हें आसानी से संचालित किया जा सकता है।
    • मिश्रित सेमी-इंटेंसिव कार्प कल्चर तकनीक अपनाई, जिससे उत्पादन में वृद्धि हुई।
    • बाजार से महंगा चारा खरीदने की बजाय, बची हुई दालों और सोयाबीन न्यूट्री का मिश्रण बनाकर मछलियों को खिलाया, जिससे लागत कम हुई और मुनाफा बढ़ा।

    उनके इस प्रयास से 72 अतिरिक्त मानव-दिवसों का रोजगार सृजित हुआ और उन्होंने एक व्यक्ति को स्थायी रोजगार भी प्रदान किया।

    मत्स्य पालन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता हिमाचल

    जीवन लाल की सफलता यह दर्शाती है कि हिमाचल प्रदेश में मत्स्य पालन की अपार संभावनाएं हैं। उनकी कहानी उन सभी किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त करना चाहते हैं।

    मत्स्य पालन, न केवल आर्थिक लाभदायक है, बल्कि यह स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी प्रदान करता है। सरकार की योजनाओं और सही मार्गदर्शन के साथ, कोई भी व्यक्ति इस क्षेत्र में सफलता की नई ऊंचाइयां छू सकता है।

  • वैदिक मंत्रों से गूंजेगा कुल्लू, पहली बार होगा क्षेत्रीय वैदिक सम्मेलन

    वैदिक मंत्रों से गूंजेगा कुल्लू, पहली बार होगा क्षेत्रीय वैदिक सम्मेलन

    आठ राज्यों के विद्वान लेंगे भाग, वेद पाठ और शोभायात्रा मुख्य आकर्षण

    कुल्लू की पावन वादियां पहली बार वैदिक मंत्रों के दिव्य उच्चारण से गूंजने जा रही हैं। शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की स्वायत्तशासी संस्था महर्षि सान्दीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान, उज्जैन और श्री व्यास संस्कृत महाविद्यालय, रघुनाथपुर, कुल्लू के संयुक्त तत्वावधान में 22 से 24 फरवरी 2025 तक क्षेत्रीय वैदिक सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।

    तीन दिवसीय सम्मेलन में भाग लेंगे वैदिक विद्वान और विश्वविद्यालयों के कुलपति

    श्री व्यास संस्कृत महाविद्यालय, रघुनाथपुर के प्राचार्य बालकृष्ण शर्मा ने जानकारी दी कि यह आयोजन कुल्लू जनपद, हिमाचल प्रदेश में पहली बार आयोजित किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण वैदिक सम्मेलन में आठ राज्यों से करीब 150 वैदिक विद्वान भाग लेंगे। साथ ही, विभिन्न संस्कृत विश्वविद्यालयों के कुलपति भी इस आयोजन की गरिमा बढ़ाएंगे।

    वेद पाठ और वैदिक संस्कृति पर होंगे विशेष सत्र

    इस तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान वेद पाठ और वैदिक संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में –

    • वैदिक मंत्रों का उच्चारण
    • वेदों का आधुनिक समाज में महत्व
    • वैदिक संस्कृति और जीवनशैली

    जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। विद्वान अपने शोध और विचारों को साझा करेंगे, जिससे प्रतिभागियों को वैदिक ज्ञान का लाभ मिलेगा।

    शोभायात्रा के साथ होगा सम्मेलन का विशेष समापन

    सम्मेलन के अंतिम दिन भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों का प्रदर्शन किया जाएगा। यह शोभायात्रा वैदिक संस्कृति की झलक और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत अनुभव प्रदान करेगी।

    वैदिक संस्कृति को जीवंत बनाने की पहल

    यह सम्मेलन वैदिक संस्कृति को संरक्षित और प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस आयोजन के माध्यम से युवाओं को संस्कृत भाषा और वैदिक परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

    प्राचार्य बालकृष्ण शर्मा ने कहा कि यह सम्मेलन शिक्षा, अध्यात्म और भारतीय परंपराओं को समृद्ध करने की दिशा में एक नई शुरुआत करेगा।

  • बंद हुई डाक जीवन बीमा पॉलिसी को फिर से चालू करने का मौका

    बंद हुई डाक जीवन बीमा पॉलिसी को फिर से चालू करने का मौका

    डाक विभाग का विशेष अभियान, डिफॉल्ट राशि पर छूट का लाभ उठाएं

    धर्मशाला, 18 फरवरी। अगर आपकी डाक जीवन बीमा (PLI) पॉलिसी किसी कारणवश बंद हो गई है, तो इसे फिर से सक्रिय करने का शानदार अवसर आ गया है। भारतीय डाक विभाग ने 1 मार्च 2025 से 31 मई 2025 तक विशेष पुनर्जीवन अभियान की घोषणा की है, जिसके तहत पॉलिसी धारकों को डिफॉल्ट राशि पर विशेष छूट दी जाएगी।

    डिफॉल्ट राशि पर आकर्षक छूट
    डाक अधीक्षक धर्मशाला मंडल, रविंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि इस योजना के तहत अलग-अलग श्रेणियों के तहत छूट प्रदान की जा रही है:

    • 1 लाख रुपये तक की पुनर्जीवन राशि पर 25% की छूट, अधिकतम 2500 रुपये तक
    • 1 लाख से 3 लाख रुपये तक की पुनर्जीवन राशि पर 25% की छूट, अधिकतम 3000 रुपये तक
    • 3 लाख रुपये से अधिक की पुनर्जीवन राशि पर 30% की छूट, अधिकतम 3500 रुपये तक

    कैसे उठाएं लाभ
    यदि आपकी डाक जीवन बीमा पॉलिसी बंद हो गई है और आप इसे फिर से शुरू करना चाहते हैं, तो निकटतम डाकघर में संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, अधिक जानकारी के लिए दूरभाष नंबर 01892-226924 या 01892-229205 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

    सीमित अवधि का अवसर
    यह विशेष अभियान केवल 1 मार्च 2025 से 31 मई 2025 तक चलेगा, इसलिए पॉलिसी धारकों को जल्द से जल्द इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए। यह योजना उन लोगों के लिए एक सुनहरा अवसर है, जिन्होंने अपनी पॉलिसी किसी कारणवश जारी नहीं रख पाई थी और अब इसे फिर से चालू करना चाहते हैं।

  • हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने जारी किया स्नातक प्रैक्टिकल परीक्षा का शेड्यूल

    हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने जारी किया स्नातक प्रैक्टिकल परीक्षा का शेड्यूल

    बीए , बीएससी और बीकॉम की प्रैक्टिकल परीक्षाएं 1 से 15 मार्च के बीच आयोजित होंगी

    हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) ने स्नातक डिग्री कोर्स (बीए, बीएससी और बीकॉम) की प्रैक्टिकल परीक्षाओं का शेड्यूल जारी कर दिया है। विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी कॉलेजों में 1 से 15 मार्च के बीच प्रैक्टिकल परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी।

    कॉलेज प्रशासन अपने स्तर पर लैब सुविधाओं और एग्जामिनर की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए परीक्षा का संचालन करेंगे। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने सभी संबद्ध कॉलेजों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, ताकि परीक्षाएं सुचारू रूप से संपन्न हो सकें।

    20 मार्च से संभावित वार्षिक परीक्षाओं से पहले प्रैक्टिकल परीक्षा अनिवार्य

    एचपीयू से संबद्ध करीब एक लाख विद्यार्थी इस साल 20 मार्च से संभावित वार्षिक परीक्षाओं में शामिल होंगे। लेकिन इससे पहले, उन्हें निर्धारित समय के भीतर प्रैक्टिकल परीक्षाएं देनी होंगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि 15 मार्च तक हर हाल में सभी प्रैक्टिकल परीक्षाएं पूरी की जाएं

    प्रैक्टिकल परीक्षा के दिन ही छात्रों के अवार्ड ऑनलाइन अपलोड करने की भी हिदायत दी गई है। कॉलेज प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि एग्जामिनर द्वारा परीक्षा का पूरा ब्यौरा प्राचार्य को सील बंद लिफाफे में सौंपा जाए, जिसमें –

    • परीक्षा में उपस्थित छात्रों की हाजिरी,
    • परीक्षा में शामिल हुए कुल छात्र-छात्राओं की संख्या,
    • अंकों का पूरा विवरण शामिल हो।

    प्रैक्टिकल परीक्षा और इंटरनल असेसमेंट को लेकर जारी निर्देश

    एचपीयू प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इंटरनल असेसमेंट की जानकारी परीक्षा शुरू होने से एक सप्ताह पहले ऑनलाइन अपलोड करनी होगी। यह निर्देश इसलिए दिया गया है ताकि छात्रों के रोल नंबर जनरेट करने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की समस्या न हो और वे समय पर अपना रोल नंबर डाउनलोड कर सकें।

    समस्या होने पर यहां करें संपर्क

    यदि किसी कॉलेज को प्रैक्टिकल परीक्षाओं और इंटरनल असेसमेंट अपलोड करने में कोई समस्या आती है, तो वे निम्नलिखित नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं –

    • एचपीयू हेल्पलाइन नंबर: 0177-2831873
    • मोबाइल नंबर: 9459571331, 7018854459

    एचपीयू प्रशासन ने सभी कॉलेजों से अपेक्षा की है कि वे निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी प्रक्रियाओं को पूरा करें, ताकि छात्रों की परीक्षाएं सुचारू रूप से संपन्न हो सकें।

  • हिमाचल के जल स्रोतों के संरक्षण के लिए विशेष नीति की जरूरत / उप-मुख्यमंत्री

    हिमाचल के जल स्रोतों के संरक्षण के लिए विशेष नीति की जरूरत / उप-मुख्यमंत्री

    राजस्थान में हुई राष्ट्रीय जल सम्मेलन में उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की मांग

    राजस्थान के उदयपुर में 18 और 19 फरवरी को आयोजित दूसरे ऑल इंडिया स्टेट वाटर मिनिस्टर्स कॉन्फ्रेंस में हिमाचल प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने पहाड़ी राज्यों के लिए अलग और प्रभावी जल नीति की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्र के जल स्रोत प्रभावित हो रहे हैं, जिससे पानी की कमी बढ़ती जा रही है। इस संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार को पहाड़ी राज्यों के लिए विशेष सहयोग और अनुदान की नीति बनानी चाहिए।

    बदलते मौसम चक्र से घटते जल स्रोतों पर चिंता

    उप-मुख्यमंत्री ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण असमय बारिश और कम बर्फबारी से जल स्रोतों का जल स्तर लगातार घटता जा रहा है। वैज्ञानिक अध्ययनों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि हिमालयी ग्लेशियर प्रति दशक 20-30 मीटर की दर से पिघल रहे हैं, जिससे नदियों के प्रवाह में अस्थिरता आ रही है और जल संकट गहराता जा रहा है। इससे न केवल पेयजल की उपलब्धता प्रभावित हो रही है, बल्कि सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन भी संकट में आ रहे हैं।

    पारंपरिक और आधुनिक उपायों को एक साथ अपनाने की जरूरत

    मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि जल संरक्षण के लिए हमें पारंपरिक उपायों को संरक्षित करते हुए आधुनिक तकनीकों और नवाचारों को अपनाना होगा। पहाड़ी क्षेत्रों में जल स्रोतों की पुनर्भरण संरचनाओं और वर्षा जल संग्रहण को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि जल संरक्षण और प्रबंधन के लिए पहाड़ी राज्यों को विशेष वित्तीय सहायता दी जाए।

    जल जीवन मिशन के तहत लंबित योजनाओं के लिए विशेष फंड की मांग

    उप-मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में यह भी उठाया कि हिमाचल प्रदेश का 65% हिस्सा वन क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जिससे राज्य की विकास परियोजनाओं के लिए भूमि की उपलब्धता सीमित हो जाती है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश का जल, पर्यावरण और पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान है, और इसी आधार पर राज्य को विशेष वित्तीय पैकेज दिया जाना चाहिए।

    उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत करीब 1000 पेयजल योजनाएं अधूरी पड़ी हैं, जिनके लिए 2000 करोड़ रुपये की जरूरत है। उन्होंने केंद्र सरकार से उच्च पर्वतीय इलाकों के लिए एक विशेष वित्तीय सहायता योजना (फंडिंग विंडो) बनाने का प्रस्ताव भी रखा, जिससे किन्नौर, लाहौल-स्पीति और चंबा के दूरस्थ क्षेत्रों में एंटी-फ्रीज जल आपूर्ति योजनाओं का निर्माण किया जा सके। इन योजनाओं के तहत इन्सुलेटेड पाइपलाइन, हीटेड टैप सिस्टम और सौर-चालित पंप जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

    सिंचाई योजनाओं और ग्रामीण जल संकट पर भी चिंता

    मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि हिमाचल की 90% ग्रामीण आबादी कृषि, बागवानी और सब्जी उत्पादन पर निर्भर है। ऐसे में जल संकट से उनकी आजीविका पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत लंबित सिंचाई परियोजनाओं को जल्द मंजूरी देने की मांग की। साथ ही, सूखे और खराब पड़े करीब 2000 हैंडपंप और ट्यूबवेल के पुनर्भरण के लिए 1269.29 करोड़ रुपये की परियोजना के लिए वित्त पोषण की आवश्यकता बताई।

    शहरीकरण के कारण बढ़ रही जल संकट की समस्या

    उप-मुख्यमंत्री ने तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण जल आपूर्ति और स्वच्छता की गंभीर चुनौतियों पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन और अमृत योजना के तहत अभी तक उपनगरीय इलाकों की जरूरतें पूरी तरह से नहीं हो पाई हैं। इन क्षेत्रों के लिए अलग से मानदंड तैयार करने और वित्तीय सहायता बढ़ाने की जरूरत है।

    हिमाचल को जल-सुरक्षित बनाने के लिए केंद्र से सहयोग की अपील

    मुकेश अग्निहोत्री ने सम्मेलन में कहा कि हिमाचल प्रदेश ‘इंडिया-2047 – जल सुरक्षित राष्ट्र’ के संकल्प को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए विशेष अनुदान और लचीली नीतियों की व्यवस्था की जाए, ताकि जल संरक्षण और प्रबंधन को मजबूत किया जा सके।

  • सिरमौर में सड़कों के निर्माण को नई रफ्तार , प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत करोड़ों की परियोजनाएं मंजूर / डॉ. राजीव बिंदल

    सिरमौर में सड़कों के निर्माण को नई रफ्तार , प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत करोड़ों की परियोजनाएं मंजूर / डॉ. राजीव बिंदल

    सड़कों के विकास के लिए केंद्र सरकार का सहयोग जारी , कई अहम प्रोजेक्ट्स पर हो रहा काम

    प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत सिरमौर जिले में ग्रामीण सड़कों के निर्माण और सुधार के लिए केंद्र सरकार द्वारा करोड़ों रुपये की सहायता दी जा रही है। इस योजना के अंतर्गत नाहन, पच्छाद, श्री रेणुका जी, पांवटा साहिब और शिलाई विधानसभा क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जिनसे क्षेत्र की संपर्क सुविधा को बेहतर बनाया जा सकेगा। इस संबंध में जानकारी देते हुए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने एक प्रेस वार्ता में बताया कि केंद्र की मोदी सरकार ने हिमाचल प्रदेश के विकास को प्राथमिकता देते हुए लगातार वित्तीय सहायता प्रदान की है, जिससे प्रदेश की सड़कों के निर्माण कार्य जारी रह सकें। उन्होंने कहा कि विपक्ष केंद्र सरकार से मदद न मिलने का आरोप लगाता है, जबकि हकीकत यह है कि प्रदेश में कई सड़क परियोजनाएं केंद्र के सहयोग से ही संचालित की जा रही हैं।

    हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में ग्रामीण सड़कों के निर्माण और सुधार कार्यों को गति देने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत लगातार धनराशि स्वीकृत की जा रही है। वर्ष 2017 से 2022 के बीच केंद्र सरकार द्वारा PMGSY-I, II और III के अंतर्गत करोड़ों रुपये की धनराशि जारी की गई, जिससे जिले में सड़क निर्माण कार्यों को मजबूती मिली।

    सत्ता परिवर्तन के बावजूद, 2022 से 2024-25 के दौरान भी केंद्र की मोदी सरकार सिरमौर जिले में PMGSY के तहत वित्तीय सहयोग जारी रखे हुए है। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया गया है, जिनकी सरकार से हिमाचल को इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए आर्थिक सहायता मिल रही है।

    नाहन लोक निर्माण सर्कल को 262.21 करोड़ रुपये की मंजूरी

    2021-22 से 2024-25 के दौरान नाहन लोक निर्माण सर्कल को 262.21 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की गई। इसके तहत नाहन, पच्छाद, श्री रेणुका जी, पांवटा साहिब और शिलाई विधानसभा क्षेत्रों में सड़क निर्माण और मरम्मत के कई महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं।

    नाहन विधानसभा क्षेत्र में चल रही सड़क परियोजनाएं

    • जैथलघाट से कून सड़क और झमीरिया-रामाधौण-दघेड़ा सड़क के लिए 14.59 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं और दोनों सड़कों पर कार्य जारी है।
    • जमटा से महीपुर सड़क और ददाहू से बेचड़ का बाग सड़क के लिए 23.60 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।
    • जमटा से बिरला सड़क के लिए 17.73 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत कर काम किया जा रहा है।
    • धौलाकुंआ से बायला सड़क के लिए 13.32 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है।

    पच्छाद विधानसभा क्षेत्र में हो रहे विकास कार्य

    • नैनाटिक्कर से देवथल रोड12.19 करोड़ रुपये
    • मरयोग से घरयार रोड34.37 करोड़ रुपये
    • बागथन रोड4.71 करोड़ रुपये
    • शलाना जोड़ी से पैरवीखड रोड7.41 करोड़ रुपये
    • थानाघाट रोड4.49 करोड़ रुपये
    • रेरी गुसान से डोगा सड़क3.87 करोड़ रुपये
    • टाली भुज्जल सड़क7.05 करोड़ रुपये
    • छामला से धणेच सड़क13.08 करोड़ रुपये
    • राजगढ़ से यशवंत नगर सड़क8.03 करोड़ रुपये

    श्री रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र में सड़क निर्माण

    • संगडाह से पालर सड़क11.03 करोड़ रुपये
    • पालर से पिडियाधार सड़क6.05 करोड़ रुपये

    पांवटा साहिब विधानसभा क्षेत्र में स्वीकृत सड़कें

    • रामपुरघाट नवादा सड़क5.02 करोड़ रुपये
    • बदरीपुर से गुज्जर कॉलोनी-जामनीवाला खारा सड़क13.37 करोड़ रुपये

    शिलाई विधानसभा क्षेत्र में हो रहे सड़क निर्माण कार्य

    • नाया से काड़ी सुंदरा रोड6.38 करोड़ रुपये
    • द्राबिल-नैनीधार से हालाहं सड़क – बजट मंजूरी के साथ निर्माण कार्य जारी।

    हिमाचल को केंद्र सरकार से लगातार मिल रहा सहयोग

    प्रदेश सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि केंद्र से हिमाचल को आर्थिक सहायता नहीं मिल रही, लेकिन PMGSY के तहत सिरमौर जिले को लगातार सड़कों के निर्माण और सुधार कार्यों के लिए भारी राशि दी जा रही है। केंद्र की मदद से ही प्रदेश सरकार इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को पूरा कर रही है, जबकि अन्य कई कार्य ठप पड़े हैं।

    ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और संपर्क सुविधा को बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार का सहयोग जारी है, जिससे सिरमौर जिले में सड़कें पहले से अधिक मजबूत और सुगम हो सकेंगी।

  • हिमाचल में कानून व्यवस्था को मजबूत करने की नई पहल , छह श्रेणियों में वर्गीकृत होंगे पुलिस थाने / मुख्यमंत्री

    हिमाचल में कानून व्यवस्था को मजबूत करने की नई पहल , छह श्रेणियों में वर्गीकृत होंगे पुलिस थाने / मुख्यमंत्री

    अपराध दर, जनसंख्या और सुरक्षा आवश्यकताओं के आधार पर होगा पुलिस थानों का पुनर्गठन

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देशानुसार हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी 135 पुलिस थानों को छह श्रेणियों में वर्गीकृत करने का निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य कानून व्यवस्था को मजबूत करना, अपराध नियंत्रण को प्रभावी बनाना और जनता को बेहतर सुरक्षा सेवाएं प्रदान करना है।

    इस वर्गीकरण में विभिन्न महत्वपूर्ण कारकों को ध्यान में रखा गया है, जिनमें –

    • जनसंख्या घनत्व
    • भौगोलिक क्षेत्र
    • अपराध दर
    • वीआईपी मूवमेंट
    • यातायात प्रबंधन
    • अंतरराज्यीय सीमाओं की निकटता
    • पर्यटन स्थलों की सुरक्षा

    शामिल हैं। इससे पुलिस व्यवस्था अधिक संगठित होगी और कानून व्यवस्था को लागू करने में अधिक प्रभावशीलता आएगी।

    छह श्रेणियों में होंगे पुलिस थाने, अपराध के आधार पर किया गया वर्गीकरण

    प्रदेश सरकार ने वार्षिक अपराध पंजीकरण की संख्या के आधार पर पुलिस थानों को ए प्लस से ई तक कुल छह श्रेणियों में बांटा है।

    • ए प्लस श्रेणी – ऐसे पुलिस थाने, जहां 250 से अधिक वार्षिक अपराध दर्ज होते हैं। प्रदेश में इस श्रेणी के 15 पुलिस थाने चिन्हित किए गए हैं।
    • ए श्रेणी – 5 पुलिस थानों को इस श्रेणी में रखा गया है।
    • बी श्रेणी – 25 पुलिस थानों को शामिल किया गया है।
    • सी श्रेणी – 47 पुलिस थाने इस श्रेणी में होंगे।
    • डी श्रेणी – 28 पुलिस थानों को इस वर्ग में रखा गया है।
    • ई श्रेणी – 15 पुलिस थानों को इस सूची में शामिल किया गया है।

    प्रत्येक श्रेणी के पुलिस थानों में कर्मियों की संख्या होगी निर्धारित

    राज्य सरकार ने हर श्रेणी के पुलिस थानों में कर्मियों की संख्या भी तय कर दी है, जिससे पुलिस बल की सही ढंग से तैनाती सुनिश्चित की जा सके।

    • ए प्लस श्रेणी के पुलिस थानों में कम से कम 70 पुलिस कर्मी तैनात किए जाएंगे।
    • ए श्रेणी में 65 पुलिसकर्मी होंगे।
    • बी श्रेणी के पुलिस थानों में 48 कर्मी होंगे।
    • सी श्रेणी में 37 पुलिसकर्मी रहेंगे।
    • डी श्रेणी में 25 पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे।
    • ई श्रेणी में 19 पुलिसकर्मी कार्यरत होंगे।

    इसके अलावा, प्रत्येक थाने में जांच अधिकारियों की संख्या एफआईआर दर्ज होने की आवृत्ति के आधार पर तय की जाएगी

    मुख्यमंत्री ने दिए तैनाती के निर्देश, पुलिस बल की कार्यक्षमता होगी मजबूत

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पुलिस विभाग को निर्देश दिए हैं कि नए वर्गीकरण के अनुसार पुलिस थानों में बल की तैनाती जल्द से जल्द की जाए। इस रणनीति के तहत अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा और कानून व्यवस्था को और अधिक सख्ती से लागू किया जा सकेगा।

    इस पहल से पुलिस की कार्यकुशलता में वृद्धि होगी, जिससे राज्य में जनता को अधिक सुरक्षित और प्रभावी पुलिस सेवाएं मिलेंगी।