HNN/ कुल्लू
हिमाचल प्रदेश में महिलाओं में मादक द्रव्यों की लत की उभरती प्रवृत्ति को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेड क्रॅास सोसायटी, जिला शाखा कुल्लू द्वारा भुन्तर में महिलाओं के लिए 15 बिस्तरों का एकीकृत नशा निवारण एवं पुर्नवास केन्द्र की शुरूआत की है। उपायुक्त एवं रेडक्रॉस जिला शाखा के अध्यक्ष आशुतोष गर्ग ने जानकारी देते हुए कहा कि महिला एकीकृत पुर्नवास केन्द्र भुन्तर में स्थापित प्रदेश का ऐसा एकमात्र केन्द्र है जो महिलाओं के लिए नशा मुक्ति तथा पुर्नवास के उपचार हेतु मुफ्त सेवाएं प्रदान कर रहा है। पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने भी भुंतर स्थित महिलाओं के लिए बने इस एकीकृत नशानिवारण एवं पुनर्वास केंद्र का दौरा किया था तथा वहां कार्यान्वित की जा रही सुविधाओं की जानकारी ली।
इस अवसर पर, रोगियों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी गलतियों को सुधारने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वे कोशिश करें कि यहां से जल्द स्वस्थ होकर वापस घर जाएं और कार्य करते हुए सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ें। इस महिला एकीकृत पुर्नवास केन्द्र में नशा मुक्ति के ईलाज हेतु 15 बिस्तरों का प्रावधान करते हुए डॉक्टर, मनोचिकित्सक, काउंसलर, नर्स, वार्ड अटेन्डेन्ट, परियोजना समन्वक, सुरक्षा कर्मी, सफाई कर्मी इत्यादि की तैनाती की गई है। भवन में स्नानागार/शौचालय, नर्सिंग स्टेशन, मनोरंजन गतिविधियों तथा सामूहिक परामर्श के लिए एक कॉमनरूम तथा सुरक्षा की दृष्टि से भवन में सी.सी. टी.वी. कैमरे तथा चारों ओर फेंसिंग की व्यवस्था की गई है।
इस केन्द्र का मुख्य उद्देश्य मादक द्रव्यों के दुष्परिणामों के बारे जनमानस में जागरूकता करना है ताकि उन्हे शराब तथा अन्य मादक द्रव्यों से होने वाले स्वास्थ्य पर दुष्परिणामों से बचाया जा सके। ऐसी महिलाएं जो नशे की आदी हो चुकी है उनकी पहचान कर नशा मुक्ति के इलाज हेतु प्रेरित करना था उन्हे इलाज उपरान्त पुर्नवासित करना है। इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए एकीकृत पुर्नवास केन्द्र की टीम शैक्षणिक संस्थाओं पंचायतों तथा महिला मंडलों का नियमित दौरा कर रही है। केन्द्र में डॅाक्टर द्वारा सुबह 10:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक ऐसे मरीजों की जांच की जाती है। गत 3 महीनों में केन्द्र द्वारा 144 महिलाओं को इलाज की सुविधा प्रदान की जा चुकी है।
मरीज के लक्ष्णों के मुल्यांकन के उपरान्त डॅाक्टर यह तय करता है कि मरीज का उपचार बाह्य रोगी या आवासीय रोगी के रूप में किया जाना है। रोगियों को निःशुल्क दवाईयां दी जाती है तथा मनोविज्ञानिक/काउंसलर द्वारा रोगी तथा उसके परिवार के सदस्यों के लिए परामर्श सत्रों का आयोजन किया जाता है। गम्भीर लक्षणों वाले रोगियों को उनकी सहमति से केन्द्र में भर्ती किया जाता है। आमतौर पर ऐसे रोगियों को 21 दिनों से 30 दिनों तक केन्द्र में इलाज किया जाता है तथा उपचाराधीन रोगियों को डॅाक्टर तथा स्टाफ नर्सों की निगरानी में उनके बी.पी, तापमान तथा अन्य लेब टेस्ट करवाए जाते है।
किसी भी आपात स्थिति में उचित अस्पताल में रैफर करने की व्यवस्था की गई है। इलाज के दौरान मनोचिकित्सक काउंसलर द्वारा व्यक्तिगत परामर्श तथा पारिवार के सदस्यों की परामर्श सुविधाएं दी जा रही हैं। उपचार अवधि के दौरान सुबह के समय शारीरिक व्यायाम, ध्यान और योगा प्रशिक्षित स्टाफ द्वारा करवाएं जाते है। दिन के समय निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार विभिन्न गतिविधियों में उन्हे व्यस्त रखा जाता है। प्रत्येक महिला की पुनर्वास आवश्यकताओं की पहचान भी की जाती है तथा उनकी रूचि, क्षमता के दृष्टिगत पुर्नवास योजना तैयार कर उन्हे व्यवसायिक प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाती है। महिलाओं के इलाज को गोपनीय रखा जाता है तथा किसी भी व्यक्ति को उपचाराधीन महिलाओं की जानकारी नहीं दी जाती है।